मुजफ्फरनगर। स्वास्थ्य विभाग ने जिला अस्पताल ओपीडी को आभा आईडी से जोड़ने की कवायद शुरू कर दी है। इसके लिए जल्द ही ओपीडी में कार्यरत चिकित्सकों को कंप्यूटर-लैपटॉप उपलब्ध कराए जाएंगे। मरीज को दिए गए परामर्श का ब्यौरा चिकित्सक की ओर से उसकी आभा आईडी में दर्ज किया जाएगा।
जिला अस्पताल पहुंच रहे करीब 30 प्रतिशत मरीजों का आभा आइडी बनवाना अनिवार्य किया गया है। मरीजों के लिए यह व्यवस्था 10 माह से लागू है। चिकित्सक से परामर्श लेने के लिए मरीज जब अस्पताल में अपना पंजीकरण कराता है, तो उसी समय उसकी आभा आइडी बना दी जाती है। अभी तक पंजीकरण पर्ची बनवाते समय केवल आभा आइडी बनाई जा रही थी। शीघ्र ही चिकित्सक की ओर से कराई जा रही जांच और उसकी रिपोर्ट सहित दिए गए परामर्श का ब्यौरा भी आभा आइडी में दर्ज किया जाएगा।
इस तरह बन रही आभा आइडी
जिला अस्पताल पंजीकरण केंद्र पर एक क्यूआर कोड चस्पा किया गया है। जिसे स्मार्ट फोन से स्केन कर मोबाइल में एक साॅफ्टवेयर डाउनलोड कर लिया जाता है। जिस पर आधार नंबर डालने पर एक ओटीपी आता है। जिसके माध्यम से टोकन नंबर पता कर पंजीकरण केंद्र पर बैठे अस्पताल कर्मी को बताकर पर्ची हासिल की जाती है।
आयुष्मान भारत हेल्थ एकाउंट है आभा आइडी : डॉ.विपिन
डिप्टी सीएमओ डॉ. विपिन कुमार ने बताया कि आभा आइडी का मतलब आयुष्मान भारत स्वास्थ्य खाता से है। यह एक डिजिटल स्वास्थ्य आईडी है। जिसमें 14 अंकों का एक विशिष्ट कोड होता है। यह आईडी किसी भी मरीज को भारत के डिजिटल हेल्थकेयर इकोसिस्टम में भागीदार के रूप में पहचानती है। जिसे पूरे देश में स्वास्थ्य सेवा प्रदाता स्वीकार करते हैं।