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हिंदी आंदोलन में जेल गए थे ओमप्रकाश गुप्ता

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दिल्ली में आर्यप्रतिनिधि सभा ओमप्रकाश गुप्ता का अभिनंदन करती- फाईल फोटो। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
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हिंदी आंदोलन में जेल गए थे ओमप्रकाश गुप्ता
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मुजफ्फरनगर। हिंदी को सींचने का काम आर्य समाज ने भी किया है। वर्ष 1957 को जब पंजाब सरकार ने विधानसभा में पंजाबी को राष्ट्रभाषा बनाए जाने का प्रस्ताव पास कर केंद्र को भेजा, तो आर्य समाज ने आंदोलन किया। इस आंदोलन में जनपद के आर्य समाजी ओमप्रकाश गुप्ता जेल गए। वह अंबाला और पटियाला की जेलों में बंद रहे।
देश में हिंदी को छोड़ पंजाबी को राष्ट्रभाषा बनाने का प्रस्ताव 1957 में पंजाब विधानसभा ने पारित किया। आर्य समाज पंजाब के साथ पूरे देश के आर्य समाजी इसके विरोध में खड़े हो गए। पंजाब में जेल भरो आंदोलन चला। मातृभाषा हिंदी की रक्षा को लेकर सिसौली के मूल निवासी ओमप्रकाश गुप्ता भी इस आंदोलन में कूद पड़े। आंदोलन के दौरान 23 नवंबर 1957 में पब्लिक पैलेस चंडीगढ़ से इनकी गिरफ्तारी हुई। पहले अंबाला और उसके बाद इन्हें सेंट्रल जेल पटियाला भेजा गया। 23 जनवरी 1958 तक ओमप्रकाश गुप्ता जेल में रहे। गुप्ता के साथ गुरुकुल घरोंडा हरियाणा के अधिष्ठाता स्वामी रोमेश्वरानंद सरस्वती, प्रकाशवीर शास्त्री, बलराज मधोक, शोभाराम प्रेमी भजनोपदेशक जेल में रहे। आंदोलन की सफलता के बाद चांदनी चौक के दीवान हॉल में आर्य प्रतिनिधि सभा ने जेल गए सभी आंदोलनकारियों का अभिनंदन किया था। ओमप्रकाश गुप्ता लंबे समय तक आर्य समाज से जुड़े रहे और अंतिम समय तक आर्य समाज शहर के अध्यक्ष रहे।
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जेल में ही किया था बेटे का नामकरण
मुजफ्फरनगर। ओमप्रकाश गुप्ता जिस समय जेल में बंद थे उसी समय आठ दिसंबर 1957 को इनके बेटे का जन्म हुआ। आंदोलन में विजय की उम्मीद के साथ बेटे का नाम विजय रखा गया। विजय गुप्ता शहर में कारोबार करते हैं।
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