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पेपर उद्योग पर ओमिक्रॉन का साया, नहीं मिल रहे ऑर्डर

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पेपर उद्योग पर ओमिक्रॉन का साया, नहीं मिल रहे ऑर्डर
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मुजफ्फरनगर। कोरोना के नए स्वरूप ओमिक्रॉन से जिले के पेपर उद्योग को जोर का झटका लगा है। 47 से ज्यादा देशों में संक्रमण के फैलने का सबसे ज्यादा असर स्थानीय पेपर उद्योग पर पड़ा है। तीसरी संभावित लहर और लॉकडाउन से लोग सहमे हुए हैं, जिस कारण पेपर के नए ऑर्डर नहीं दिए जा रहे हैं। सबसे ज्यादा नुकसान सफेद पेपर बनाने वाली फैक्ट्रियों को उठाना पड़ रहा है। जिले की दो इकाईयां सफेद पेपर बनाती है, जिनके पास नए ऑर्डर नहीं पहुंच रहे हैं। पेपर मिलों का कार्य करीब तीस फीसदी प्रभावित हो चुका है, जबकि सफेद पेपर का कार्य 60 फीसदी तक प्रभावित हो गया है। इसकी वजह यह है कि लोगों को लॉकडाउन का डर सता रहा है, जिस वजह से माल स्टॉक नहीं करना चाहते।
पेपर उद्योग पर मंडराया सबसे बड़ा खतरा
पेपर मेन्यूफेक्चिरंग एसोसिएशन के अध्यक्ष पूर्व चेयरमैन पंकज अग्रवाल का कहना है कि ओमिक्रॉन से पेपर इकाईयों को नुकसान हुआ है। पेपर की डिमांड घट गई है। सफेद पेपर के ऑर्डर नहीं मिल रहे हैं। अन्य फैक्टरी भी प्रभावित है।
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विदेशों से नहीं मिल रहे नए ऑर्डर
उद्यमी अजय कपूर का कहना है कि दुनियाभर में ओमिक्रॉन के नए मामले सामने आ रहे हैं। इस वजह से पेपर उद्योग प्रभावित हुआ है। विदेशों से नए ऑर्डर नहीं मिल रहे हैं। जो ऑर्डर पहले मिले हुए हैं, उन्हें ही पूरा किया जा रहा है।
रोज बनता है पांच हजार टन पेपर
जिले में रोजाना करीब बीस करोड़ कीमत का पांच हजार टन पेपर बनता है। इसमें सफेद पेपर के अलावा क्राफ्ट, डुप्लेक्स और अन्य तरह का रोजमर्रा के प्रयोग में आने वाला कागज होता है।
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पेपर की जिले में 32 फैक्टरी
पेपर उद्योग से जुड़ी जिले में 32 फैक्टरी है। इनमें 25 फैक्टरी फिल्हाल उत्पादन कर रही है। सफेद कागज बनाने वाली दो फैक्टरी इस समय मुश्किल हालात से गुजर रही है।
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