शुकतीर्थ के ओम शांति सेंटर में कथा के दौरान नृत्य करते बाल कलाकार।
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मोरना। ओम शांति ईश्वरीय विश्वविद्यालय आश्रम में चल रही भागवत कथा में ब्रह्मकुमारी प्रवेश बहन ने कहा कि श्रीमद्भागवत सुनने मात्र से ही मनुष्य जीवन प्रकाशमय हो जाता है। मनुष्य को अपने मन का नाता प्रभु से जोड़कर संपूर्ण भाव से परमपिता परमेश्वर के पास जाए, क्योंकि सब उसी परमपिता परमेश्वर का है। भगवान भी हमसे सौदा करते हैं। हमारे मुट्ठी भर चावल लेकर हमें सोने के महल देते हैं और हमारे तन, मन की दरिद्रता को समाप्त कर देते हैं। इसीलिए हम मंदिर खाली हाथ नहीं जाते, क्योंकि भगवान भी अपने दर से किसी को खाली हाथ नहीं भेजते। वह हमारे स्वास्थ्य, संपत्ति के भंडार भर देते हैं।
गीता में श्रीकृष्ण ने कहा है कि जो तेरा है, उसे अपना नहीं मानता, जो तेरे हैं उसे नहीं जानता, वही तेरे दुखों का कारण है। गीता ज्ञान में कहा गया है कि स्वयं को जान, प्रभु को पहचान, यही सत्य ज्ञान का सार है। श्रीमद्भागवत गीता ज्ञान से मनुष्य का जीवन सर्व महान प्रकाश स्वरूप हो जाता है। अगर गीता ज्ञान का प्रकाश नहीं तो जीवन में अंधकार है। अंधकार वाला जीवन दुखमय व्यक्ति का जीवन है। भगवान ही प्रकाशवान, सर्व शक्तिमान व सुखों का भंडार है।