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जगमिंद्र बोले, लॉस एंजेल्स में पदक से चूक का हमेशा रहा मलाल

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स्वर्गीय दारा सिंह के साथ द्रोणाचार्य अवार्डी जगमिंद्र सिंह - फोटो : MUZAFFARNAGAR
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मुजफ्फरनगर। कुश्ती के अखाड़े में अमिट पहचान बनाने वाले द्रोणाचार्य अवार्डी जगमिंद्र सिंह कहते हैं कि 38 साल पहले ओलंपिक पदक से चूक जाने का आज तक मलाल है। लॉस एजेंल्स में कांस्य पदक के लिए हुई कुश्ती में हारकर चौथे नंबर पर रहे थे। एक खिलाड़ी के तौर 1980 के मास्को और 1984 के लॉस एजेंल्स ओलंपिक में भाग लिया। भारतीय टीम के कोच के तौर पर 2014, 2016 और 2021 ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व किया। बतौर प्रशिक्षक लंदन में दो पदक भी दिलाए, लेकिन हमेशा लॉस एजेंल्स में एक अंक से पदक चूक जाने की टीस बनीं रही। बरवाला गांव निवासी जगमिंद्र कहते हैं कि वर्तमान में खेल सुविधा बढ़ी हैं। पश्चिम यूपी के लिए सलावा में बन रही खेल यूनिवर्सिटी एतिहासिक होगी। खिलाड़ियों को अवसर मिलेंगे और वह आगे निकलकर देश का नाम रोशन करेंगे।
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खेल यूनिवर्सिटी से ऊंचा होगा नाम : मुराद अली खान
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिले का नाम रोशन करने वाले जानसठ के ट्रैप शूटर मुराद अली खान को 1996 में अर्जुन अवार्ड से नवाजा गया था। प्रशिक्षक के तौर पर वह लंदन ओलंपिक का हिस्सा रहे। उनका कहना है कि सलावा खेल यूनिवर्सिटी से लाभ होगा। युवाओं के पास खुद को निखारने के बड़े अवसर होंगे।
लक्ष्य तय कर जान झोंक दें खिलाड़ी : अनुज चौधरी
ओलंपियन पहलवान अनुज चौधरी का कहना है कि लक्ष्य हासिल कर खिलाड़ी को जान लगा देनी चाहिए। पहले के मुकाबले सुविधा बढ़ी है, लेकिन अभी और सहूलियतों की आवश्यकता है।
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ओलंपिक पदक मेरा सपना : दिव्या काकरान
अर्जुन अवार्डी पहलवान दिव्या काकरान ने कहा कि ओलंपिक पदक जीतना उसका सपना है। इसके लिए वह जी जान से जुटी हैं। लक्ष्य हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं।
पदक के लिए जान लड़ा दूंगा : गौरव
भारतीय कुश्ती टीम का हिस्सा गौरव बालियान ने कहा कि ओलंपिक पदक जीतना हर पहलवान की तमन्ना होती है। इसके लिए लक्ष्य बनाकर तैयारी कर रहा हूं। मेहनत जारी रहेगी।
यह भी कर चुके प्रतिनिधित्व
ओलंपिक में जिले के लिए एथलीट प्रियंका पंवार ने भी ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व किया है। इंचियोन एशियाई खेलों में प्रियंका ने देश को स्वर्ण पदक दिलाया था।
कोच मिले और स्टेडियम में सुविधाएं
खिलाड़ियों का कहना है कि स्टेडियम में प्रत्येक खेल का नियमित कोच होना चाहिए। एथलीट संदीप कुमार, जितेंद्र कुमार कहते हैं कि अगर स्टेडियम में सुविधा होगी तो खिलाड़ियों को बाहर नहीं जाना पड़ेगा।
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