गिरते जल स्तर पर नगर पालिका भी सचेत हो गई है। अत्यधिक जल दोहन को रोकने के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। नागरिकों के लिए पानी की बर्बादी करना अब जोखिम भरा होगा। पालिका एक-एक बूंद का हिसाब लेगी। इसके लिए नागरिकों के घरों पर वाटर रीडिंग मीटर लगाए जा रहे हैं। इसमें प्रतिदिन के साथ हर माह कितना पानी खर्च किया गया है, इसकी पूरी जानकारी फीड रहेगी।
केंद्र और प्रदेश सरकार जल संरक्षण पर जोर दे रही है। पानी की बर्बादी थामने के लिए इंतजाम किए जा रहे हैं। इसके लिए नगर पालिका को वाटर रीडिंग मीटर लगाने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए पालिका प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है। नागरिक बेवजह पानी बहाने से पीछे नहीं है।
कई इलाके ऐसे हैं, जहां आबादी अधिक है, लेकिन पर्याप्त मात्रा में पेयजल आपूर्ति नहीं है। इसके पीछे पाइप लाइन का प्रेशर कम होना है। यह प्रेशर अधिक पानी के इस्तेमाल से डाउन होता है। अब वाटर रीडिंग मीटर लगाकर पानी की बर्बादी को रोकने के साथ संरक्षण के लिए प्रेरित किया जाएगा।
वाटर रीडिंग मीटर लगाकर एक दिन, एक माह में कितना पानी खर्च किया गया है। इसकी सटीक जानकारी हो सकेगी। उसके आधार पर ही बिल बनेगा। ईओ विकास सैन ने बताया कि पालिका की ओर से वाटर कनेक्शन पर मीटर लगाए जा रहे हैं। जिसके माध्यम से हर माह रीडिंग जांचने के बाद बिजली के बिल की तरह पैसा वसूला जाएगा। फिलहाल काफी कनेक्शनों पर मीटर लग गए हैं। पूरे नगर में यह कनेक्शन लगाएं जाएंगे।
2500 स्थानों पर लगाए गए मीटर
मुजफ्फरनगर। शहर में अभी तक पालिका प्रशासन 2500 स्थानों पर वाटर रीडिंग मीटर लगा चुका है। जो पानी की मुख्य लाइन से जोड़ा गया है। इसमें पालिका की लाइन के साथ मोटर पंप से इस्तेमाल होने वाले पानी की भी जानकारी रहेगी। शहर में करीब सात हजार से अधिक कनेक्शन पर मीटर लगाए जाने है।
पालिका में 47000 पानी के कनेक्शन
मुजफ्फरनगर। नगर पालिका के 50 वार्ड में करीब 47000 हजार घरेलू और व्यवसायिक कनेक्शन हैं। जिनसे अलग-अलग रुप से पानी का चार्ज वसूला जाता है। पालिका हर माह 25, 35, 50 और 70 रुपये के हिसाब पानी का चार्ज वसूलता है।