मुजफ्फरनगर। शामली के लिसाढ़ गांव में दंगे का मुकदमा दर्ज कराने और अदालत में तथ्यों से मुकर जाने के मामले में वादी को नोटिस जारी किया गया है। अपर जनपद एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट संख्या दो के पीठासीन अधिकारी अंजनी कुमार सिंह ने आदेश दिया कि धारा 344 के अंतर्गत दंड प्रक्रिया संहिता का प्रकीर्ण वाद पंजीकृत किया जाए।
मुजफ्फरनगर दंगे के दौरान आठ सितंबर 2013 को फुगाना थाना क्षेत्र के लिसाढ़ गांव निवासी खुरशैद ने घर में घुसकर आगजनी, लूटपाट का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। मुकदमे का ट्रायल शुरू हुआ। वादी ने मुकदमा दर्ज कराने के दौरान जो आरोप लगाए थे, उन तथ्यों से अदालत में मुकर गया।
अपर जनपद एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट संख्या दो के पीठासीन अधिकारी अंजनी कुमार सिंह ने सुनवाई की। अदालत ने वादी खुरशैद को नोटिस जारी करने के आदेश दिए हैं।
यह लिखवाया गया था मुकदमा
वादी ने मुकदमा दर्ज कराया था कि आठ सितंबर को परिवार घर में बैठा था। आरोपी घर में घुसे और तोड़फोड़ की। दहेज के 22 लाख रुपये के सामान का नुकसान किया। यही नहीं 37 हजार रुपये नकद लूट लिए थे।
वादी अदालत में यह बोला
लिसाढ़ में रुक्का-रोला हो रहा था। इस दौरान वह अपने परिवार के साथ कांधला के कैंप में चला गया। यहीं पर दाउद नाम के व्यक्ति ने प्रार्थना पत्र पर अंगूठा लगवा लिया था। तहरीर स्वयं नहीं लिखवाई थी और न ही घटना देखी।
इन आरोपियों को कर दिया गया दोषमुक्त
अदालत ने एक जून को आरोपी कृष्ण डीलर को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त करार दिया था। अन्य आरोपी पहले ही दोषमुक्त हो चुके थे।