भारत सरकार का खुले में शौच मुक्त अभियान जिले में दम तोड़ता दिखाई दे रहा है। पंचायती राज विभाग के अफसरों की उदासीनता के चलते 214 गांवों में खुले में शौच मुक्त की प्रक्रिया भी शुरू नहीं हो पाई है। विभाग 103 गांवों को ओडीएफ में शामिल होने की बात कर रहा है, लेकिन कमिश्नर की अंतिम मुहर इन पर भी नहीं लग पाई है। जिले में 498 गांव हैं और सभी गांवों को दो अक्तूबर तक खुले में शौच से मुक्त करने का दावा किया जा रहा है।
उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद भारत सरकार ने पूरे देश में गांवों और शहरों को खुले में शौच से मुक्त करने का अभियान चलाया है। घर में शौचालय बनाने का पैसा भी सरकार उपलब्ध करा रही है। जनपद को भी दो अक्तूबर तक खुले में शौच से मुक्त करने का टारगेट दिया गया है। कार्यक्रम का संचालन डीपीआरओ पारुल सिसौदिया द्वारा किया जा रहा है। भारत सरकार के इस कार्यक्रम को लेकर जिला पंचायत राज अधिकारी पूरी तरह उदासीन हैं।
अभियान की धीमी गति का पता इसी बात से लगता है कि सरकार के तमाम प्रयासों के बाद भी जिले के 498 गांवों में से मात्र 284 में ही प्रक्रिया शुरू हो पाई है। जिले के 214 गांव ऐसे हैं, जिनमें अभियान की शुरुआत ही नहीं हो पाई है। जिन 284 गांवों में ट्रिगरिंग का कार्य कराया गया है,
उनमें मात्र 103 गांव ही ऐसे हैं, जिनके प्रधानों ने खुले में शौच से मुक्त होने का दावा किया है। हालांकि इन गांवों को भी मंडल स्तर पर गठित टीम ने स्वीकृति प्रदान नहीं की है। विभाग के आंकड़ों के अनुसार ही जिले में अभी 12,470 शौचालयों की आवश्यकता है। इनमें विभाग के पास केवल 5369 परिवार ही ऐसे हैं, जिनके बैंक खाते उपलब्ध हैं। विभागीय अफसरों की उदासीनता के कारण सीडीओ और डीएम के प्रयास भी सफल नहीं हो पा रहे हैं।
मॉनिटरिंग करेंगे : सीडीओ
खुले में शौच मुक्त अभियान को लेकर सीडीओ अंकित अग्रवाल का कहना है कि वह भारत सरकार के इस अभियान को लेकर गंभीर हैं। डीएम जीएस प्रियदर्शी भी अभियान की सफलता को लेकर सजग हैं। अब वह खुद ही कार्यों की मॉनिटरिंग करेंगे। गांवों में जनसहयोग से अभियान को सफल बनाया जाएगा।