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महंत मंत्रिमंडल में किसी को नहीं मिली लालबत्ती 

Sun, 19 Mar 2017 11:29 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
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भाजपा की सरकार बनने पर जश्न मनाते कार्यकर्ता। - फोटो : अमर उजाला
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मोदी मैजिक में जिले में भाजपा को सभी छह विधानसभा सीटों पर सफलता मिली। हालांकि महंत मंत्रिमंडल के पहले विस्तार में किसी विधायक को स्थान नहीं मिल पाया। मंत्री बनने के दौड़ में शामिल अवतार सिंह भड़ाना भी पिछड़ गए। पहली बार विधानसभा पहुंचे चार विधायकों के अरमान अनुभव की कमी की वजह से पूरे नहीं हो पाए।
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परिवर्तन की आंधी में जिले की सभी छह विधानसभा सीटों पर भाजपा का भगवा लहराया है। वर्ष 2012 के चुनाव में कोई सीट नहीं जीत सकी बीजेपी ने अबकी बार क्लीन स्विप किया। दंगे से उपजा मतों का धुव्रीकरण हो, चाहे पीएम मोदी का रंग, मीरापुर को छोड़ कर भाजपा ने शेष सीटें बड़े अंतर से जीती है। लखनऊ में महंत आदित्यनाथ के शपथ ग्रहण समारोह पर सभी की निगाहें टिकी थी। सूबे के नए मुख्यमंत्री के मंत्रिमंडल में किसी विधायक को स्थान नहीं मिलने से मायूसी छा गई।

चार बार सांसद रह चुके मीरापुर विधायक अवतार सिंह भडाना को मंत्रिमंडल में नहीं लिए जाने पर लोगों को अचरज हुआ। गुर्जर समाज के बड़े नेताओं में शुमार भड़ाना को ऐनवक्त पर भाजपा ने प्रत्याशी बनाया था। शीर्ष नेतृत्व के फैसले पर मीरापुर से टिकट के दावेदार भी हक्के-बक्के रह गए थे। उनकी जीत भी चौंकाने वाली रही। मात्र 193 मतों से वह जीते हैं। भड़ाना के मंत्री नहीं बनने से क्षेत्र में मायूसी है। जनपद में खतौली से विक्रम सैनी. चरथावल से विजय कश्यप, बुढ़ाना से उमेश मलिक और पुरकाजी से प्रमोद ऊंटवाल चुने गए।  मुजफ्फरनगर सदर सीट से कपिल देव अग्रवाल दूसरी बार विधायक बने हैं।
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अनुभव की कमी और संगठन की रिपोर्ट भी महंत आदित्यनाथ के मंत्रिमंडल में जिले को लालबत्ती नहीं मिलने की वजह हो सकती है। हालांकि आरएसएस से जुड़े चरथावल विधायक विजय कश्यप के राज्यमंत्री बनाए जाने को लेकर कयास था। अति पिछड़ा वर्ग कोटे में उन्हें लालबत्ती की उम्मीद थी। मुजफ्फरनगर सांसद डॉ संजीव बालियान केंद्रीय जल संसाधन राज्यमंत्री हैं।

इसके बावजूद यहां से किसी अन्य को महंत के मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलना पार्टी के लोगों को खल गया। सहारनपुर मंडल के अन्य दो जिलों में नकुड़ विधायक डॉ धर्म सिंह सैनी और थानाभवन विधायक सुरेश राणा ही राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार बन पाए हैं। भाजपा जिलाध्यक्ष रुपेंद्र सैनी का कहना है कि जिले को केंद्र में प्रतिनिधित्व मिला हुआ है। जिन क्षेत्रों में आवश्यकता है वहां से विजेता प्रत्याशियों को मंत्रिमंडल में लिया गया है। मंत्रिमंडल विस्तार में जिले को लाल बत्ती मिल सकती है।

पिछली सरकारों में ये थे मंत्री
वर्ष 2012 में अखिलेश सरकार में जिले से केवल चितरंजन स्वरूप राज्यमंत्री बने थे। सदर सीट से सपा विधायक चितरंजन के पास नौ विभागों को राज्यमंत्री का प्रभार था। लंबी बीमारी के चलते 2015 में उनका निधन हो गया था। वर्ष 2007 में मायावती के मंत्रिमंडल में जिले से जानसठ विधायक डॉ यशवंत सिंह और खतौली विधायक योगराज सिंह राज्यमंत्री बनाए गए थे।

 कश्यप समर्थक मायूस
चरथावल। बेसब्री से इंतजार के बाद भी दिल के अरमान अधूरे रह गए। डेढ़ दशक बाद चरथावल सीट पर कमल खिला है। पूर्व में दो बार अधिवक्ता रणधीर सिंह भाजपा विधायक चुने गए थे, लेकिन उन्हें मंत्री बनने का मौका नहीं मिला था। अब की बार भाजपा के टिकट पर विजयी हुए विजय कश्यप के महंत आदित्यनाथ के मंत्रिमंडल में शामिल होने की पूरी उम्मीद थी। उन्हें लालबत्ती न मिलने से कार्यकर्ता मायूस हैं। अर्पित भारद्वाज, राहुल सिंह पुंडीर, सुशील कश्यप कहते हैं कि क्षेत्रीय विकास के लिए कश्यप को मंत्री बनाया जाना चाहिए था। छात्र कुश गर्ग और जितार्थ त्यागी भी निराश हैं।
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