मुजफ्फरनगर। करीब दो माह पहले साल्हाहेड़ी स्कूल के अध्यापक संजीव की सड़क दुर्घटना में हुई मौत का सच सामने आ गया है। आईजी मेरठ के निर्देश पर एसपी क्राइम ने मौका-ए-वारदात पर पहुंचकर मामले की छानबीन की। जांच में पैसों के लेनदेन का मामला सामने आया है। हत्या को हादसे का रूप दिया गया था।
दो माह पूर्व भौराकलां के अलावलपुर निवासी संजीव साथी सोंटा निवासी पप्पू के साथ शुक्रताल गंगा स्नान जाने के लिए बुग्गी-भैंसे से निकले थे। पीनना के पास संजीव की मौत हो गई थी। पप्पू ने किसी वाहन के टक्कर मारने की जानकारी परिजनों और पुलिस को दी थी। घटना परिजनों के गले नहीं उतरी। वह लगातार वारदात के पीछे किसी साजिश के होने की आशंका जाहिर कर रहे थे। मृतक की पुत्री आशू चौधरी ने आईजी आलोक शर्मा से जांच की गुहार लगाई। आईजी ने जांच क्राइम ब्रांच को सौंपी।
विवेचक देशराज ने फिर भी मौत को दुर्घटना ही माना। आशू ने दूसरी बार फिर आईजी सुजीत पांडेय से मिली और विवेचक की शिकायत की। आईजी ने एसपी क्राइम राकेश कुमार जौली को मामले की जांच सौंपी। एसपी क्राइम ने घटनास्थल का दौरा करने के साथ ही आसपास के लोगों के बयान के आधार पर घटना को दुर्घटना नहीं हत्या करार दिया है। बकौल जौली, कई ग्रामीणों और भट्ठा मजदूरों से पूछताछ में कई अहम बात सामने आईं। मृतक की बुग्गी एक्सीडेंट होने के बावजूद कहीं से नहीं टूटी।
दूसरे वाहन का कोई शीशा या कोई पार्ट टूटा हुआ मौके से नहीं मिला। उसके सिर मेें चोट के अलावा दूसरा निशान नहीं था। वादी जिस समय घटनास्थल पर पहुंचा तो वहां आरोपी पक्ष की बोलेरो खड़ी थी। आरोपी घायल को अस्पताल ले जाने के बजाए वहीं खड़ा रहा। मौत के बाद से ही मृतक का फोन बंद है, जो कि आज तक नहीं मिला है। मृतक और आरोपी के बीच पैसों के लेनदेन को लेकर विवाद भी था। राकेश जौली ने बताया कि अध्यापक संजीव की मौत का कारण सड़क दुर्घटना नहीं हत्या है। पप्पू की गिरफ्तारी के लिए टीम का गठन कर दिया है।