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कुपोषण का शिकार हो रहे नवजात, 4020 बच्चों में मिला सबसे कम वजन 

Mon, 29 Jan 2018 12:09 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/मुजफ्फरनगर
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कुपोषण की शिकार बच्ची। - फोटो : अमर उजाला
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केंद्र और प्रदेश सरकार के दावों के बावजूद बच्चों का कुपोषण छटने का नाम नहीं ले रहा है। जिले में मासूम बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। इनमें छह माह से लेकर पांच वर्ष की आयु वर्ग के बच्चे शामिल हैं। इनके अलावा भी गर्भ से भी नवजात कुपोषित पैदा हो रहे हैं। जिले में बच्चों की संख्या करीब तीन लाख से अधिक आंकी गई है। 
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बच्चों में कुपोषण को दूर करने से लिए समय-समय पर स्वास्थ्य विभाग अनेक कार्यक्रम चला रहा है। कृमि मुक्ति (पेट का कीड़ा) को मारने के लिए एल्बेंडाजॉल की टेबलेट खिलाई जाती है। जबकि प्राथमिक विद्यालयों, सीएचसी और पीएचसी पर बच्चों को आयरन की गोलियां बांटी गई।

नेशनल हेल्थ मिशन के तहत परिवारों को कुपोषण के प्रति जागरूक किया गया। मगर, जिले के बच्चों में कुपोषण की मात्रा घटने का नाम नहीं ले रही है। जिला महिला अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर नवंबर और दिसंबर माह में 12,810 बच्चों का वजन किया गया, तो उनमें 2.5 किलो से भी कम वजन मिला है। यह सभी नवजात शिशु हैं।
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विभागीय जांच में सामने आया है कि करीब 4020 बच्चों में तीव्रता से कुपोषण मिला है। यानि इन बच्चों में औसत वजन नहीं मिला है। यह सभी कुपोषण का शिकार हैं। अब इन बच्चों को कुपोषण से निजात दिलाने के लिए विभाग पहल करेगा। इन परिवारों को कुपोषण से बचाव के उपाय बताए जाएंगे। 

जिले में साढ़े तीन लाख बच्चे 
मुजफ्फरनगर। जिले में छह माह से लेकर पांच वर्ष आयु के बच्चों का सर्वे किया गया, जिसमें सामने आया है कि जनपदभर में छह माह से पांच वर्ष तक के करीब 3,49,766 बच्चे हैं। इनमें कुपोषण की जांच-पड़ताल की जाएगी। 

42 हजार बच्चों को कराया स्तनपान 
मुजफ्फरनगर। नवजात शिशुओं को बीमारियों से बचाने के लिए जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान (मां का दूध पिलाना) कराना जरूरी है, ताकि उनमें बीमारियों से लड़ने के साथ ही विकास होने की क्षमता बढ़ सके। इसके लिए एक साल में जिले में करीब 42,299 बच्चों को अस्पताल में एक घंटे के भीतर स्तनपान कराया गया है। 

बोले अधिकारी.. 
नवजात बच्चों में कुपोषण होने के पीछे कई लक्षण है। 2.5 किलोग्राम के बच्चों को नॉर्मल वजन में रखा गया है, जबकि 1.8 किलोग्राम से नीचे के बच्चों को कमजोर श्रेणी में रखा जाता है। कुपोषण होने के पीछे मां और बच्चे का बीमार होना है। 
-डॉ अमिता गर्ग, सीएमएस, जिला महिला चिकित्सालय मुजफ्फरनगर। 

बच्चों को कुपोषण से निजात दिलाने के लिए समय-समय पर अभियान चलाए गए हैं। स्कूलों में आयरन की गोलियां वितरित की गई। कुपोषण का शिकार बच्चों की संख्या जिले में अन्य के मुकाबले कम है। कुपोषण से बचाव को कार्यशालाएं की जाएंगी। 
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-डॉ पीएस मिश्रा, सीएमओ मुजफ्फरनगर। 
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