सियासी ट्रैक पर बंदूकबाज का पहला ही निशाना चूक गया है। निकाय चुनाव में मतदाताओं पर फिल्म अभिनेता नवाजुद्दीन सिद्दीकी का जादू नहीं चल पाया। बुढ़ाना नगर पंचायत अध्यक्ष पद चुनाव में उनकी भाभी सबा सिद्दीकी सपा प्रत्याशी थीं, जिनकी जमानत जब्त हो गई है। सबा की जीत के लिए नवाज ने मुंबई से बुढ़ाना आकर चुनाव प्रचार किया था।
पर्दे पर अदाकारी का मांझी सियासी मंच पर फ्लॉप हो गया। नगर निकाय चुनाव में सपा ने उनके भाई फैजुद्दीन की पत्नी सबा सिद्दीकी को प्रत्याशी बनाया था। पूर्व सीएम अखिलेश यादव से नवाजुद्दीन की नजदीकियों की बदौलत ही सबा को पार्टी ने मौका दिया था।
राजनीति में परिवार का वजूद बढ़ाने के लिए बॉलीवुड के अभिनेता नवाजुद्दीन ने भाभी के चुनाव प्रचार में अपना रंग दिखाया। प्रचार के दौरान नवाज ने हर अंदाज में मतदाताओं को लुभाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उन्होंने रोड शो भी किया और युवाओं से सीधा संवाद भी। नवाज की खूबी यह रही कि वह सीधे-सादे अंदाज में सबसे मिले। सिर्फ इतना ही नहीं मतदान के दिन खुद लाइन में लगकर वोट डाला।
बुढ़ाना से मुंबई तक के सफर में नवाजुद्दीन ने अपने अभिनय से जैसी ऊंचाईयां हासिल की हैं, वैसे ही सियासत के रंगमंच पर दिखाई नहीं दी। मतदाताओं ने उनकी अपील को सिरे से खारिज कर दिया। नवाज को सुनने के लिए भीड़ तो आई, मगर उनके प्रत्याशी को वोट नहीं दे पाए। सपा प्रत्याशी सबा सिद्दीकी नगर पंचायत अध्यक्ष पद के लिए केवल 791 वोट ही ले पाईं। हार-जीत के आंकड़ों में सबा कोई चुनौती नहीं दे पाईं और उन्हें प्रत्याशियों में पांचवां स्थान मिला।
बजरंगी भाईजान, रईस, हरामखोर, फिकरे अली, गैंग्स ऑफ वासेपुर और बाबू मोशाय बंदूकबाज आदि फिल्मों से बॉलीवुड में छाए नवाजुद्दीन सिद्दीकी सियासी ट्रैक पर चूक गए हैं। भाभी सबा सिद्दीकी के जरिये उन्होंने बुढ़ाना में भविष्य में राजनीति में हस्तक्षेप का संकेत दिया था, मगर पहली बार में ही मतदाताओं ने नवाज के मंसूबे पर पानी फेर दिया है। बताते चले कि 19 मई 1974 को बुढ़ाना में जन्मे अभिनेता नवाजुद्दीन को अखिलेश सरकार ने यश भारती से नवाजा था, जबकि उनकी मां मेहरुनिशा सिद्दीकी को बीबीसी ने भारत की 100 प्रभावशाली महिलाओं में चुना था।