अमर उजाला ब्यूरो
मुजफ्फरनगर। पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच गांव में अधिकारों की लड़ाई तेज हो गई है। 30 साल पहले ग्राम पंचायत का दर्जा खो देने वाले नसीरपुर के ग्रामीणों ने कहा कि वह नंगला से अलग होना चाहते हैं, उनके वोट की कोई कीमत नहीं रह गई है। विकास नहीं होता।
बुढ़ाना क्षेत्र के नसीरपुर, नंगला और रियावली मिलकर नंगला ग्राम पंचायत के नाम से जाने जाते हैं। साल 1995 तक नसीरपुर के पास ग्राम पंचायत का दर्जा रहा। इसके बाद परिसीमन हुआ, जनसंख्या का आंकड़ा कम होने पर नंगला ग्राम पंचायत में मर्ज कर दिया गया। अब पिछले 30 साल से प्रधान नसीरपुर का नहीं चुना गया है। अधिवक्ता उत्थान समिति के अध्यक्ष एहतशाम सिद्दीकि, मुकेश कुमार और बबलू कहते हैं कि नंगला की आबादी अधिक है।
वह अपनी वोट की ताकत से अपना प्रधान चुन लेते हैं और विकास के कार्य नसीरपुर तक नहीं पहुंच पाते। ऐसे में इस बार के परिसीमन में नसीरपुर को फिर अलग ग्राम पंचायत का दर्जा दिया जाना चाहिए।