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धर्म की रक्षा को प्रभु ने श्रीकृष्ण के रूप में अवतार लिया

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मुजफ्फरनगर। जब भी धरती पर आसुरी शक्ति हावी हुईं, ईश्वर ने धर्म की रक्षा के लिए अवतार लेकर पृथ्वी पर धर्म की स्थापना की। मथुरा में राजा कंस के अत्याचारों से व्यथित होकर धरती की करुण पुकार सुनकर नारायण ने कृष्ण रूप में देवकी के आठवें पुत्र के रूप में जन्म लिया और धर्म और प्रजा की रक्षा कर कंस का अंत किया।
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श्री केशव सेवा समिति द्वारा लक्ष्मी नारायण मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथा व्यास डॉ सत्यकृष्ण शास्त्री ने भगवान श्री कृष्ण के जन्म की कथा का वर्णन किया। उन्होंने कहा, जीवन में भागवत कथा सुनने का सौभाग्य मिलना बड़ा दुर्लभ है। जब भी हमें यह सुअवसर मिले, इसका सदुपयोग करना चाहिए। कथा का सुनना तभी सार्थक होगा, जब उसके बताए हुए मार्ग पर चलकर परमार्थ का काम करें। राम कथा का संक्षिप्त में वर्णन करते हुए कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने धरती को राक्षसों से मुक्त करने के लिए अवतार धारण किया। इसी प्रकार भगवान श्री कृष्ण ने भी राक्षसों का अंत करने के लिए अवतार लिया। श्रीकृष्ण के जन्म से जुड़े भजन भी गाए गए। यजमान राकेश कुुमार रहे। मोहनलाल, राजकिशोर बंसल, राकेश, विनय मित्तल, राजन सिंघल, संदीप मलिक, सतीश अग्रवाल ,संदीप सिंघल, अंकुर गोयल, ओपी चौहान, सुभाष मित्तल, डॉ अमित मित्तल, अरुण गर्ग, नरेश गुप्ता, डा. कैलाश अरोरा आदि मौजूद रहे।
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