संवाद न्यूज एजेंसी
खतौली। श्रीकृष्ण संकीर्तन मंडल गीता भवन में चल रही श्रीराम कथा के दूसरे दिन कथा व्यास कृष्णदास विपिन भारद्वाज ने शिव विवाह का विस्तार पूर्वक वर्णन किया। उन्होंने सती चरित्र के बारे में बताया कि सती अपने पिता दक्ष के यहां गई। वहां पर भगवान शंकर का अपमान देखकर सती स्वयं को योग अग्नि में भस्म कर देती हैं।
दूसरे जन्म में यही सती पर्वत राज हिमालय के यहां पार्वती रूप में जन्म लेती हैं। माता पार्वती ने भगवान शंकर को प्राप्त करने के लिए घनघोर तपस्या की। इसके उपरांत भगवान शिव ने माता पार्वती को अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया। इसके उपरांत शिव पार्वती विवाह हुआ। शिव विवाह में श्रद्धालु नाचते गाते हुए भगवान शंकर की बारात में शामिल हुए। कथा में मुख्य रूप से मंदिर के पुजारी पंडित दिनेश शास्त्री, कमेटी के प्रधान मनोज अग्रवाल, दीपक गर्ग सीए, मंत्री मुकेश अग्रवाल, कोषाध्यक्ष पंकज भटनागर, भावेश गुप्ता, संजीव मिश्रा, वरुण शर्मा, रामकुमार, कंवर सेन जैन, अमित त्यागी आदि उपस्थित रहे।