मुजफ्फरनगर। केंद्रीय जल संसाधन राज्यमंत्री डॉ संजीव बालियान ने कहा कि जब वह छोटे थे हिंडन में नहाते थे, गांव के सभी लोग नदी का पानी पीते थे। अब नदी प्रदूषित होकर सूख गई है। मर चुकी इन नदियों को पुनर्जीवित करने के लिए नमामि गंगे कार्यक्रम में शामिल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा प्रदूषित पानी पेपर इंडस्ट्री का आता है। गुजरात के मॉडल पर पेपर मिलों को यहां ट्रीटमेंट प्लांट लगाने चाहिए। नदियों को पुराने स्वरूप में लाने के लिए जनसहभागिता जरूरी है।
नगर पालिका सभागार में क्लीन काली, हिंडन यात्रा कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ बालियान ने कहा कि हिंडन, काली, कृष्णा हमारे सामने मरी हैं, जब हम छोटे थे हमारे गांव कुटबी के सारे बच्चे नदी में नहाने जाते थे। हम नदी में नहाते भी थे और नदी का पानी भी पीते थे। उन्हें याद है कि गांव का जगता ताऊ नदी में दस पैसे फेंकता था और पानी इतना साफ था कि बच्चे उन दस पैसे को देखकर उठा लाते थे। सूखी और प्रदूषित इन नदियों को देखकर मन दुखी होता है। 2008 में नदी बचाने को गांव में एक गोष्ठी कराई परिणाम कुछ नहीं निकला। उन्होंने कहा कि काली नदी को प्रदूषित करने में पेपर मिल जिम्मेदार हैं। पेपर मिलों को गुजरात मॉडल की तर्ज पर संयुक्त रूप से ट्रीटमेंट प्लांट लगाने चाहिए।
पेपर मिलों पर तो नियंत्रण हो जाएगा, लेकिन घर-घर में पशुओं के कत्लखानों के पानी से जो प्रदूषण हो रहा है, उसका जिम्मेदार कौन होगा। नदियों को प्रदूषण मुक्त करने के लिए नमामि गंगे कार्यक्रम में शामिल किया जा रहा है, इससे धन की कोई कमी नहीं रहेगी। उन्होंने पालिकाध्यक्ष से कहा कि यदि वह दिल से काम करना चाहते हैं तो विरोधी होकर भी हम उनके साथ हैं। शहर विधायक कपिलदेव अग्रवाल ने कहा कि हम नदियों में यज्ञ, हवन की राख आदि डालते रहे हैं। लोगों को जागरूक करते हुए यह बताना होगा की वह इस बची राख, सामग्री आदि का क्या करें। कार्यक्रम के संयोजक चेयरमैन पंकज अग्रवाल ने कहा कि जल के शुद्धिकरण के लिए हमें छोटे एसटीपी प्लांट लगाने होंगे। शहर का मंडी का बड़ा इलाका ऐसा है, जिसका पानी सीधे नदी में जाता है। नालों के किनारे पौधे लगाकर हम प्रदूषण को कम कर सकते हैं।
फ्रांस और जर्मनी की तर्ज पर इंडस्ट्री के पानी का खेती में प्रयोग होना चाहिए। हमारी पेपर इंडस्ट्री जल को शुद्ध करने के लिए 100 करोड़ खर्च कर चुकी है। हिंडन यात्रा कार्यक्रम से जुड़ी अना ने कहा कि प्रदेश सरकार उनका पूरा सहयोग कर रही है। 2030 तक नदियों को पूरी तरह प्रदूषण मुक्त करना है। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर नदीम ने बताया कि किस तरह उन्होंने प्रदूषित पानी को शुद्ध करने का कार्यक्रम चलाया है।
प्रोजेक्ट से जुड़े नितिन ने बताया कि मुजफ्फरनगर शहर के नालों को पानी किस तरह प्रदूषण फैला रहा है। श्रीराम कॉलेज के चेयरमैन एससी कुलश्रेष्ठ ने बताया की टाटा के साथ मिलकर उन्होंने प्रदूषण को लेकर कार्यक्रम चला रखा है।
उद्यमी कुशपुरी ने कहा कि नदियों को प्रदूषण मुक्त कराने के लिए हमें धर्म से जुडे़ लोगों का सहारा लेना होगा। जलनिगम के वाईके जैन, किसान नेता विकास बालियान, पूर्व विधायक सोमांश प्रकाश, विश्वरतन, गंगा सफाई से जुड़े संजय चतुर्वेदी एवं संचालन कर रही सोनिया लूथरा ने विचार रखे।