डीएम दिनेश कुमार सिंह ने शिविर कार्यालय में आयोजित स्वास्थ्य विभाग की आवश्यक बैठक में उप मुख्य चिकित्साधिकारियों के कार्यों से असंतोष व्यक्त किया। बैठक में भी एसीएमओ निरीक्षण रिपोर्ट के संबंध में संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाए।
डीएम ने कहा कि वह स्वास्थ्य विभाग की पाक्षिक समीक्षा करेंगे, भविष्य में भी यदि यही स्थिति रही तो निश्चित रूप से एसीएमओ और अन्य चिकित्सकों पर कार्रवाई होगी। डीएम ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि स्वास्थ्य विभाग गरीबों की सेवा नहीं कर रहा है। एसीएमओ अपने स्टाफ को सतर्क कर दें, हर स्थिति में संस्थागत प्रसवों की संख्या में इजाफा होना चाहिए। संस्थागत प्रसवों की संख्या बढ़ाने की जिम्मेदारी सभी एसीएमओ की है।
यदि आशा वर्कर या संगिनी जननी सुरक्षा योजना में सहयोग नहीं करती है तो उनको बाहर का रास्ता दिखाएं। जिला महिला चिकित्सालय से शिकायतें मिल रही हैं कि वहां पर आशा वर्कर की इंचार्ज संगिनी सहयोग नहीं करती हैं, इसमें निर्मला, मंजू त्यागी, नरेशा, ललिता व एकता त्यागी शामिल हैं, सीएमओ इसकी जांच करें यदि शिकायतें सही पाई जाती हैं तो संबंधित वर्कर को बाहर का रास्ता दिखाएं।
डीएम सिंह ने सीएमओ डॉ सबोध कुमार से कहा कि स्कूलों में स्वास्थ्य परीक्षण के लिए शिविर पाक्षिक रूप से लगवाएं, जो बच्चे कमजोर और कुपोषित पाए जाते हैं, उनका उपचार करें। बच्चों की आंखों का टेस्ट भी अवश्य कराएं, जिन बच्चों की निगाहें कमजोर हैं, उनको निशुल्क चश्मे उपलब्ध कराएं। डीएम ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि पीसीपीएनडीटी एक्ट को प्रभावी रूप नहीं दिया जा रहा है, इसकी जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की है।
उन्होंने निर्देश दिए कि स्वास्थ्य विभाग गोपनीय रणनीति तैयार करे और पीसीपीएनडीटी की जो समिति गठित है, उसको साथ में लेकर चेकिंग अभियान शुरू करें। उन्होंने कहा कि यदि इस संबंध में चिकित्सकों की संलिप्ता पाई जाती है तो संबंधितों के खिलाफ एक्ट के तहत कार्रवाई होगी। बैठक में सीडीओ अंकित कुमार अग्रवाल, सीएमओ डॉ. सुबोध कुमार, महिला सीएमएस डॉ. अमिता गर्ग, सीएमएस डॉ पीके त्यागी, डिप्टी सीएमओ डॉ बीके ओझा, एसीएमओ डॉ एसके अग्रवाल, एसीएमओ डॉ वीके सिंह आदि मौजूद थे।