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Muzaffarnagar: जुबैर हत्याकांड में आया फैसला, पूर्व मंत्री महबूब अली के समधी-दामाद समेत 11 आरोपी दोषमुक्त

Sat, 01 Aug 2026 12:53 AM IST
Mohd Mustakim अमर उजाला नेटवर्क, मुजफ्फरनगर

सार

मुजफ्फरनगर के ककरौली गांव में 15 साल पहले जुबैर की हत्या की गई थी। इस मामले में पिता और पांच बेटों समेत एक ही परिवार के 11 लोगों को आरोपी बनाया गया था। जिला जज बीरेंद्र कुमार सिंह ने फैसला सुनाया। 
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ये आरोपी हुए बरी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जिला पंचायत चुनाव की रंजिश में 15 साल पहले ककरौली गांव में सरेबाजार जुबैर (43) की गोली मारकर हत्या के मामले में एक ही परिवार के 11 आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त करार दिया गया। इनमें अमरोहा के विधायक एवं पूर्व मंत्री महबूब अली के समधी पूर्व जिला पंचायत सदस्य हबीब और उनके पांच बेटे भी शामिल हैं। जिला जज बीरेंद्र कुमार सिंह ने फैसला सुनाया।
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वारदात 16 जुलाई 2011 को हुई थी। सुबह करीब साढ़े नौ बजे जुबैर गांव में अपने चाचा अली इमाम हसनैन की कपड़े की दुकान के सामने बाजार में खड़ा हुआ था। मौके पर रास्ते से हटने को लेकर हुए विवाद और चुनावी रंजिश में हमलावरों ने लाइसेंसी और अन्य हथियारों से फायरिंग की। लाठी-डंडों से भी हमला किया गया।
 

हमले में जुबैर, सलमान और नासिर घायल हुए। अस्पताल में उपचार के दौरान जुबैर की मौत हो गई थी। मृतक की ओर से वादी आरिफ ने पूर्व जिला पंचायत सदस्य हबीब, उनके भाई रियाजुद्दीन, खुर्शीद, बेटे कामरान एडवोकेट, असरम, सहजी उर्फ तालेब, आमिर, राजा एडवोकेट उर्फ शमी मोहम्मद, साहिल, परिवार के परवेज और निजामु के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी।
 

पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। करीब 15 साल चले ट्रायल के दौरान 11 गवाह पेश किए गए। बचाव पक्ष के अधिवक्ता अनिल जिंदल ने बताया कि शुक्रवार को साक्ष्य के अभाव में सभी आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया गया है।
 

अमरोहा के विधायक महबूब से यह नाता
पूर्व जिला पंचायत सदस्य हबीब के बेटे साहिल का विवाह अमरोहा के विधायक एवं पूर्व मंत्री महबूब अली की बेटी के साथ हुआ है। हबीब के पूरे परिवार को इस प्रकरण में नामजद किया गया था।
 

प्राथमिकी में यह बताई गई रंजिश
वादी ने प्राथमिकी में लिखवाया था कि पिछले सप्ताह ही मेरी मां शाहजहां ने जिला पंचायत का चुनाव लड़ा था। बेटे जुबैर ने अपनी दादी को खुलकर चुनाव लड़वाया था। उधर, हबीब ने भी अपनी चाची को चुनाव लड़वाया था। इसी चुनाव की रंजिश में हबीब और उसके खानदान के लोग जुबैर से नाराज हो गए थे। वारदात के दिन हबीब अपनी गाड़ी लेकर सड़क से गुजरे, इसी दौरान दुकान के बाहर खड़े जुबैर के साथ कहासुनी हो गई। अपने परिवार के लोगों को बुलाकर लाइसेंसी और अन्य हथियारों से फायरिंग कर हत्या कर दी गई थी।
 

बयान : कादिर राना के प्रभाव में प्राथमिकी
पूर्व जिला पंचायत सदस्य रालोद नेता हबीब ने अदालत में बयान दिया कि पूरा मामला राजनीतिक रंजिश का है। मोरना से कादिर राना विधायक रहे, बाद में इस्तीफा देकर बसपा के टिकट पर सांसद बन गए। मोरना से उन्होंने अपने भाई नूरसलीम राना को बसपा से चुनाव लड़ाया। उपचुनाव में हमने विधायक मिथलेश पाल का समर्थन किया था। प्रदेश में बसपा की सरकार थी, इसी वजह से उनके पूरे परिवार को फंसा दिया गया। वारदात के दिन जुबैर पक्ष ने हमारे घर पर हमला किया था, जिसकी सूचना पुलिस को दी गई थी। 
 
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हमें आज इंसाफ मिला : हबीब
अदालत के फैसले के बाद पूर्व जिला पंचायत सदस्य हबीब ने कहा कि उन्हें आज इंसाफ मिल गया है। पूरे परिवार को गलत तरीके से नामजद किया गया था। अदालत से इंसाफ का भरोसा था। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता जसबीर सिंह ने भी पैरवी की।

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