थानाभवन के तत्कालीन थानाध्यक्ष वीर विक्रम सिंह ने दोनों अभियुक्तों के खिलाफ गैंगस्टर का मुकदमा पंजीकृत कराया था। पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल किया। वर्ष 2010 में अभियुक्त रामपाल की मृत्यु हो गई थी। बुधवार को अदालत ने अभियुक्त राजकुमार को गैंगस्टर के मामले में दोष सिद्ध करते हुए दो साल कारावास और पांच हजार रुपये के जुर्माने से दंडित किया।
क्या था मामला
मुकदमें की वादी बेबी के पिता पानीपत में मजदूरी करते थे और वहीं रहते थे, जबकि परिवार थानाभवन में रह रहा था। घटना की रात वादी बेबी, उसकी मां शिमला, दो भाई और एक बहन छत पर सोए हुए थे। रात करीब साढ़े ग्यारह बजे शिमला की चीख सुनकर परिवार जाग गया।
गांव के ही राजकुमार और रामपाल उर्फ सेठी शिमला के साथ हाथापाई कर रहे थे। शिमला के ऊपर मिट्टी का तेल डाल कर आग लगा दी गई, जिससे शिमला गंभीर रूप से झुलस गई और अस्पताल ले जाते समय उसकी मौत हो गई थी।