पांचों हत्यारों को आजीवन कारावास, 5.60 लाख का जुर्माना
मुजफ्फरनगर। गांव भाज्जू में करीब 12 साल पूर्व चुनावी रंजिश में हुई महिला ग्राम प्रधान, उनके बेटे और नौकर की सामूहिक हत्या में एडीजे-द्वितीय एससी-एसटी कोर्ट ने दोषी ठहराए गए पांचों अभियुक्तों को उम्रकैद और 5.60 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। हत्याकांड में नामजद कराए गए पांच अन्य आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया गया था। ग्राम प्रधान पद की चुनावी रंजिश में तिहरा हत्याकांड हुआ था।
भौराकलां थाना क्षेत्र के गांव भाज्जू में तीन अगस्त 2007 की सुबह करीब 9.30 बजे महिला ग्राम प्रधान सुखबीरी देवी अपने बेटे धर्मेंद्र व नौकर रमेश के साथ आंगन में बैठी थीं। इसी दौरान तीन बाइकों पर पहुंचे लोगों ने तीनों पर धारदार हथियारों से हमला करने के साथ ही ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। हमले में तीनों की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि महिला ग्राम प्रधान का बेटा जितेंद्र घायल हो गया था। एडीजीसी क्रिमिनल मोहम्मद अंजुम खान ने बताया कि घायल जितेंद्र ने ही भाज्जू निवासी रविंद्र, बिजेंद्र, नीटू व प्रताप के साथ ही गांव छपरौली निवासी मिंटू उर्फ हरेंद्र को नामजद व दो अज्ञात के खिलाफ भौराकलां थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। नौकर रमेश के अनुसूचित जाति से होने के कारण वारदात में एससी-एसटी एक्ट भी लगाया गया था। मारे गए धर्मेंद्र की पत्नी किरण व वादी जितेंद्र मुकदमे के चश्मदीद गवाह थे। वारदात में पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था, जबकि प्रताप फरार था। बाद में पुलिस ने प्रताप को मुठभेड़ में मार गिराया था।
सेशन सुपुर्द होने के बाद मुकदमे की सुनवाई एडीजे-द्वितीय एससी-एसटी कोर्ट में हुई, जहां गवाहों ने पांच अन्य आरोपियों के नाम भी अदालत के सामने रखे, जिनमें गांव भाज्जू के ही संजू, अनुज, सद्दाम, प्रदीप उर्फ भूरा व जितेंद्र शामिल थे। एडीजीसी क्रिमिनल व विशेष लोक अभियोजन यशपाल सिंह ने बताया कि मुकदमे की सुनवाई के दौरान कुल 15 गवाह पेश किए गए। तिहरे हत्याकांड का चश्मदीद गवाह रहा महिला ग्राम प्रधान का बेटा जितेंद्र व पुत्रवधू किरण दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते के तहत पक्षद्रोही हो गए, लेकिन कोर्ट ने इसे नहीं माना। शनिवार को न्यायाधीश पंकज कुमार अग्रवाल ने तिहरे हत्याकांड में रविंद्र, बिजेंद्र, नीटू, संजू व अनुज को दोषी करार दिया था। वहीं, साक्ष्यों के अभाव में मिंटू उर्फ हरेंद्र, सद्दाम, प्रदीप उर्फ भूरा व जितेंद्र को बरी कर दिया था। बुधवार को दोषी ठहराए गए सभी पांचों अभियुक्तों को कोर्ट ने उम्रकैद के साथ ही 5.60 लाख रुपये का जुर्माने की सजा सुनाई है। अभियुक्तों से वसूले जाने वाले जुर्माने में से 4.50 लाख रुपये पीड़ित पक्ष को दिए जाएंगे।
इन धाराओं में हुई सजा
मुजफ्फरनगर। एडीजीसी मो. अंजुम खान ने बताया कि अभियुक्तों को धारा 302 व एससी-एसटी एक्ट के तहत उम्रकैद व एक-एक लाख रुपये जुुर्माना, 307 में सात-सात साल कैद व पांच-पांच हजार रुपये जुर्माना, धारा-148 के तहत तीन-तीन साल की कैद व दो-दो हजार रुपये जुर्माना, 7 क्रिमिनल लॉ एक्ट के तहत छह-छह माह की कैद और धारा-452 में सात-सात साल की कैद व पांच-पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।