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मुजफ्फरनगर दंगा: रईसुद्दीन की हत्या और आगजनी में 22 आरोपी दोषमुक्त, 15 एफआईआर में नामजद थे 45 आरोपी

Sun, 08 Feb 2026 10:22 AM IST
मोहम्मद मुस्तकीम अमर उजाला नेटवर्क, मुजफ्फरनगर

सार

Muzaffarnagar News: मोहम्मदपुर राय सिंह गांव में भीड़ ने मुस्लिम बस्ती में हमला कर दिया था। धार्मिक स्थल में तोड़फोड़ की थी। कोर्ट ने सबूतों के अभाव में 22 आरोपियों को बरी कर दिया। 
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मुजफ्फरनगर दंगा। फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मुजफ्फरनगर दंगे के दौरान भौराकलां थाना क्षेत्र के मोहम्मदपुर राय सिंह गांव में रईसुद्दीन की हत्या, आगजनी और लूट के मामले में 22 आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त करार दिया गया। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय कोर्ट संख्या-4 के पीठासीन अधिकारी कनिष्क कुमार सिंह ने फैसला सुनाया। अलग-अलग 15 एफआईआर दर्ज हुई थी, जिनकी एक साथ सुनवाई की गई।
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भौराकलां थाने में तैनात दारोगा गंगा प्रसाद ने आठ सितंबर 2013 को मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि हमलावरों ने मुस्लिम बस्ती पर हमला कर आगजनी की और धार्मिक स्थल में तोड़फोड़ की गई। मौके पर पहुंची पुलिस पर भी हमला किया गया। वादी के अलावा कांस्टेबल अमित कुमार की बाइक में आग लगा दी गई थी।
 

गांव के रईसुद्दीन की हत्या कर दी। पुलिस ने 45 आरोपियों के विरुद्ध घटना का मुकदमा दर्ज किया था। एसआईटी की ओर से मामले की विवेचना कर 26 आरोपियों के विरुद्ध कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई। सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायालय कोर्ट संख्या-4 में हुई।
 

ट्रायल के दौरान अलग-अलग पत्रावलियों को एक साथ सुना गया। अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने में नाकाम रहा। शनिवार को सुनवाई के बाद 22 आरोपी दोषमुक्त किए गए। चार आरोपियों की ट्रायल के दौरान मौत हो गई थी।
 

इन आरोपियों को किया गया दोषमुक्त
मोहम्मदपुर राय सिंह गांव के आरोपी ऋषिपाल, सहसंरपाल, अनिल, विनोद, काला, प्रवीन, नीकू, भूरा, जगपाल, प्रेमपाल, पप्पू, सुभाष, संजीव, करण, शेर सिंह ,मदन, जयनारायण, प्रमोद, विक्की, बादल, ब्रजबीर, हरेंद्र को दोषमुक्त किया गया है। आरोपी प्रवीण, सूरज, बबलू और नकुल की मृत्यु हो चुकी है।

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13 साल चली इंसाफ की लड़ाई
भौराकलां थाना क्षेत्र का मोहम्मदपुर राय सिंह गांव दंगे के सबसे प्रभावित क्षेत्र में शामिल रहा था। खेतों में काम करने के दौरान किसानों पर हमले हुए। गांव में हुई दंगे की घटनाओं में अलग-अलग 15 मुकदमे दर्ज हुए थे, जिनमें 26 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई। इंसाफ की लड़ाई 13 साल तक चली। नंगला मंदौड़ पंचायत से लौटते लोगों पर हमले के अगले दिन आठ सितंबर को गठवाला खाप के अधिकतर गांव दंगे की चपेट में आ गए थे। मोहम्मदपुर राय सिंह गांव भी इनमें शामिल रहा था। यहां से रात के समय ही अधिकतर मुस्लिम समुदाय के लोग पलायन कर चले गए थे। आठ सितंबर को हमलावरों ने मुस्लिम बस्ती पर हमला किया, जिसमें रईसुद्दीन की जान चली गई थी। गांव के मुकदमों को सभी मुकदमों को एक साथ सुना गया। अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित नहीं कर सका और साक्ष्य के अभाव में आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया गया।


 
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