मुजफ्फरनगर में नलकूप खंड कार्यालय की अलमारी में जीपीएफ के दस्तावेज जलाए जाने के मामले में पुलिस ने आरोपी मुंशी विशाल और क्लर्क अंकुल को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों कलेक्ट्रेट परिसर से गुजर रहे थे।
पुलिस ने बताया कि करीब 83 लाख रुपये का जीपीएफ निकाला गया है। दोनों से पूछताछ की गई। मुंशी विशाल ने अपनी मां वीरमति व परिचित सुनील और संजीव के खाते में 83 लाख रुपये ट्रांसफर कराए थे। वह अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर करता था। अंकुल को पूरे प्रकरण की जानकारी थी और सहयोगी था। मामला खुलता देख दोनों ने अलमारी में आग लगा दी थी।
क्या है मामला
मेरठ रोड पर डीएम आवास के पास नलकूप खंड कार्यालय है। कार्यालय की एक अलमारी में आग लगने के मामले ने तूल पकड़ लिया। आरोप है कि नलकूप चालक नरेश चंद को दस्तावेजों में चौकीदार दर्शाकर नई पेंशन स्कीम के चलते 13.20 लाख का भुगतान कर दिया गया है। जबकि नरेश ने कोषागार में इस संबंध में आवेदन नहीं किया है। आरोपी मुंशी विशाल और अंकुल को निलंबित कर दिया गया था। दोनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया।
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दो टीम कर रही जांच
अधीक्षण अभियंता सहारनपुर अनिल शर्मा ने अधिशासी अभियंता नलकूप खंड सहारनपुर के अधिशासी अभियंता राकेश कपूर, अधिशासी अभियंता निर्माण खंड मुजफ्फरनगर राकेश कुमार और नलकूप खंड मुजफ्फरनगर के लेखाधिकरी सचिन वर्मा की टीम बनाई थी। जबकि कमिश्नर ने एडीएम प्रशासन नरेंद्र बहादुर सिंह, सहारनपुर के मंडलीय अपर निदेशक कोषागार गोविंद शुक्ला और नलकूप कार्यालय के मंडल अधीक्षण अभियंता ओमप्रकाश शर्मा की टीम गठित की है। इस टीम ने शुक्रवार को भी बयान लिए।
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