छिपेंगे नहीं, सामने आएंगे टीबी के रोगी
मुजफ्फरनगर। समाज में छिपे हुए तथा अन्य लोगों को भी संक्रमित कर रहे टीबी रोगियों को अब चिह्नित कर उनका उपचार किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग टीबी रोगियों को खोजने के लिए अभियान चलाएगा। अभियान की शुरुआत 17 फरवरी से होगी और तीन लाख की आबादी को टारगेट बनाकर रोगियों की खोज की जाएगी।
भारत सरकार देश को टीबी मुक्त करने के लिए कदम बढ़ा रही है। 2025 तक भारत को टीबी मुक्त करने का लक्ष्य निर्धारित है। इसके तहत टीबी के नियंत्रण की प्रक्रिया में भी कई बदलाव किए गए हैं। जिले में एक लाख आबादी पर टीबी रोगियों की संख्या वर्तमान में 251 है। इसे घटाकर 10 रोगियों पर लाना है। जनपद में 6300 टीबी रोगियों का उपचार चल रहा है। इनमें से 1400 प्राइवेट अस्पतालों में उपचाराधीन हैं। इन मरीजों के अतिरिक्त बड़ी संख्या में ऐसे मरीज हैं जो समाज में छिपे हुए हैं। ये लोग अन्य स्वस्थ लोगों को भी संक्रमित करते हैं। 17 फरवरी से इन मरीजों को तलाशने के लिए अभियान शुरू किया जाएगा। दस दिन के इस अभियान में तीन लाख की आबादी को केंद्र मानकर टीबी रोगियों की तलाश की जाएगी।
टीबी रोगियों की सूचना दें निजी अस्पताल
मुजफ्फरनगर। मंगलवार को स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने आईएमए पदाधिकारियों के साथ बैठक की। निजी अस्पताल संचालकों को उनके यहां उपचार करा रहे टीबी रोगियों की सूचना अनिवार्य रूप से देेने के लिए कहा गया। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. लोकेशचंद गुप्ता ने बताया कि प्राइवेट चिकित्सकों को अपने यहां उपचाराधीन टीबी रोगियों की सूचना हर माह स्वास्थ्य विभाग को देना अनिवार्य है। यदि किसी अस्पताल में टीबी रोगी का उपचार नहीं चल रहा है तो भी वे सूचना देंगे, भले ही शून्य दें। ऐसा नहीं करने पर आईपीसी की धारा 269, 270 के तहत कार्रवाई की जाएगी। साथ ही अस्पताल के पंजीकरण के नवीनीकरण पर भी रोक लगा दी जाएगी। एक मोबाइल एप भी जारी किया गया है।