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कॉलेजों में खत्म होते जा रहे छात्रावास

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राजकीय इंटर कॉलेज का बंद पडा छात्रावास। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
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कॉलेजों में खत्म होते जा रहे छात्रावास
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मुजफ्फरनगर। शहर में कॉलेजों के छात्रावास लगातार खत्म होते जा रहे हैं। डीएवी कॉलेज का छात्रावास बिस्मार कर दिया गया है। इसके स्थान पर बीएड डिपार्टमेंट की नई बिल्डिंग बन चुकी है। जीआईसी के छात्रावास में विद्युत निगम का दफ्तर चल रहा है। बंद पड़ा एसडी कॉलेज का छात्रावास खंडहर बनने की ओर अग्रसर है। शहर में केवल छोठूराम डिग्री कॉलेज का छात्रावास ही चल पा रहा है।
डिग्री कॉलेजों में एडमिशन लेने वाले ग्रामीण अंचल के अधिकतर छात्र कॉलेज के छात्रावास में ही रहते थे। छात्रावास की सुविधा शहर के तीन डिग्री कॉलेज डीएवी, एसडी और छोटूराम में मिलती रही है। राजकीय इंटर कॉलेज में मेधावी छात्रों को छात्रावास की सुविधा मिलती थी। इस समय डिग्री कॉलेजों के छात्रावास के हालात ये हैं कि डीएवी कॉलेज में 2002 से बंद पड़े छात्रावास के दस कमरों को बिस्मार करा दिया गया है। इनके स्थान पर कॉलेज ने बीएड डिपार्टमेंट बनाया है। लगभग तीस साल चले छात्रावास का यहां अस्तित्व ही खत्म कर दिया गया है।
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राजकीय इंटर कॉलेज के छात्रावास की बिल्डिंग आज भी इसके अतीत की गाथा गाती दिखाई देती है। यहां विद्युत निगम ने अपना दफ्तर जरूर बना लिया है। प्रधानाचार्य ब्रिजेश कहते हैं कि अब कोई छात्र डिमांड नहीं करता है। विद्युत निगम ने एक माह के लिए बिल्डिंग को लिया था, अब खाली करने को तैयार नहीं हैं।
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एसडी डिग्री कॉलेज में यूजीसी ग्रांट से आलीशान छात्रावास बनाया गया था। यह छात्रावास वर्ष 2002 तक चला। बंद पड़े छात्रावास को रिपेयर करने में कॉलेज ने लगभग डेढ़ करोड़ रुपये खर्च किया, लेकिन आज तक छात्रावास को शुरू नहीं किया। यहां के छात्रावास में घटी एक घटना के बाद छात्रावास बंद हो गया था। अब यह छात्रावास खंडहर बनने की ओर अग्रसर है। कॉलेज के प्राचार्य डॉ एससी वार्ष्णेय का कहना है कि प्रशासनिक दृष्टि से ही छात्रावास बंद है और अब इसके शुरू होने की उम्मीद नहीं है। चौधरी छोटूराम में 1910 में समाज के लोगों ने छात्रावास का प्रारंभ किया था। 2007 तक यह लगातार चला, लेकिन बीच में यह बंद हो गया। 2012 में समाज के जिम्मेदार लोगों ने इस छात्रावास की जिम्मेदारी प्राचार्य नरेश मलिक को दी। मलिक ने 15-16 लाख चंदा एकत्र कर पूरे हॉस्टल का जीर्णोद्धार कराया, तब से यह हॉस्टल लगातार चल रहा है। एग्रीकल्चर के पूर्वांचल के छात्र इसमें रहते हैं। हॉस्टल में छात्र से छह सौ रुपये महीना लिए जाते हैं। एक समय के भोजन के 35 रुपये तय हैं। छात्रों को यहां बिजली, पानी, इन्वर्टर और कॉमन रूप में टीवी की सुविधा दी गई है। प्राचार्य नरेश मलिक ने बताया कि इस समय 70 छात्र चौधरी चरण सिंह छात्रावास में रह रहे हैं। छात्रावास में 38 कमरे हैं। पढ़ाई का वातावरण बनाकर रखा गया है।
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