मुजफ्फरनगर दौरे पर पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दौरे से पीड़ित परिवारों को उम्मीद थी कि मुख्यमंत्री उनके घावों पर कुछ मरहम जरूर लगाकर जाएंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ -
कोरोना महामारी की दूसरी लहर में जिन परिवारों ने अपनो को खोया है, जो अव्यवस्था का कहीं न कहीं शिकार हुए है, उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से घावों पर मरहम की उम्मीद थी।
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उनका मरहम यही था कि एक बार कह देते कि ऑक्सीजन ब्लैक करने वाले, बीमारों को लूटने वाले अस्पतालों का चिट्ठा सरकार के पास है। वे छोड़े नहीं जाएंगे, कम से कम विपदा के बीच कुछ तो राहत मिलती। प्रशासनिक फैल्योर को अव्यवस्था का नाम देकर इन सबको बचा गए।
चुनाव के बाद गांवों से मौत का जो आंकडा आ रहा है, इससे यह तो निश्चित हो गया है कि कोरोना महामारी के बीच बुखार आदि से जिले में दस हजार से अधिक लोगों की मौत हुई है। ये आंकड़े भले ही सरकारी फाइलों में न हो, लेकिन गांवों के श्मशान और कब्रिस्तान इनका रिकार्ड बयां कर रहे हैं। अस्पतालों की अव्यवस्था और ऑक्सीजन की कमी से जिले में सैकड़ों जाने गई है।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दौरे से पीड़ित परिवारों को उम्मीद थी कि मुख्यमंत्री उनके घावों पर कुछ मरहम जरूर लगाकर जाएंगे। भले ही कोई कार्रवाई न करते यह तो कह देते कि जिन लोगों ने ऑक्सीजन पर ब्लैक किया। सिलिंडर में कम ऑक्सीजन निकलने से जिन मरीजों की जान गई, उनके प्रति सहानुभूति है और दोषियों को चिन्हित करेंगे। कोविड हॉस्पिटल की अव्यवस्था से जिन लोगों ने प्राण छोड़े हैं, उन मामलों की जांच कराएंगे। जिन हॉस्पिटल ने मरीजों को लूटा उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। मरीजों के साथ आपराधिक कृत्य करने वालों के लिए कानून अपना काम करेगा। कोई दो शब्द तो बोल देते योगी जी। आप आए और आकर चले गए। कोरोना महामारी में संकट से जूझ रहे लोगों के लिए कुछ तो कह जाते।