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अफसरों की लापरवाही से मुजफ्फरनगर पालिका को हर साल दस करोड़ के राजस्व की हानि

Wed, 24 Apr 2019 11:55 PM IST
Deepak Kausik अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
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नगर पालिका बोर्ड की उदासीनता और अफसरों की लापरवाही से कॉमर्शियल भवनों पर टैक्स नहीं लगने से पालिका को प्रति वर्ष दस करोड़ से अधिक के राजस्व की हानि हो रही है। व्यावसायिक कांप्लेक्स आदि के लिए शासन से दरें निर्धारित होने के बाद भी पालिका प्रशासन इन्हें लागू नहीं कर पाया है। इसका फायदा उन कॉमर्शियल भवनों के मालिकों को मिल रहा है, जो वर्तमान में कुल टैक्स का पांच प्रतिशत भी नहीं दे रहे हैं।
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नगर पालिका बोर्ड की उदासीनता और अफसरों की लापरवाही से पालिका को प्रति वर्ष दस करोड़ से अधिक की राजस्व की हानि हो रही है। दस साल पहले शासन ने स्वकर प्रणाली के निर्देश दिए थे। उस समय यहां वर्तमान शहर विधायक कपिलदेव अग्रवाल चेयरमैन थे, तब से लेकर अभी तक यहां स्वकर प्रणाली भी लागू नहीं हो पाई है। इस बीच चेयरमैन पंकज अग्रवाल का कार्यकाल पूरा हो चुका है और वर्तमान में अंजू अग्रवाल चेयरपर्सन हैं।

शहर में पालिका के रिकार्ड के अनुसार 56 हजार 247 आवासीय भवन हैं और 18330 व्यावसायिक भवन हैं। पालिका के पास एक वर्ष में केवल पांच करोड़ 25 लाख ही टैक्स के रूप में आ रहा है। आश्चर्य की बात यह है कि बीते दस सालों में व्यावसायिक भवनों पर शासन से निर्धारित दरें लागू ही नहीं की गई हैं। इसी वर्ष पांच मार्च 2019 में व्यावसायिक भवनों पर शासन के निर्देश के अनुसार टैक्स लगाए जाने का प्रस्ताव पालिका बोर्ड की बैठक में पास हुआ है।
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शहर में शासन के निर्देश के हिसाब से व्यावसायिक भवनों पर टैक्स लगता है तो पालिका की आय में प्रति वर्ष दस करोड़ से अधिक का इजाफा होगा। बड़ी बात यह हैं कि जब दस साल में हाउस टैक्स की स्वकर प्रणाली लागू नहीं हो पाई है तो व्यावसायिक भवनों पर लगने वाला टैक्स यहां लागू हो पाएगा या नहीं इस पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

नगर पालिका मुजफ्फरनगर का क्षेत्र 12.04 वर्ग किलोमीटर में फैला है। विभिन्न सर्वे कंपनियों के जो आंकड़े सामने आए हैं, उनके अनुसार शहर में 90 हजार आवासीय भवन हैं, जो नगर पालिका के रिकार्ड से कहीं ज्यादा हैं। जो पालिका अपना डाटा ही अपडेट नहीं कर पा रही है, उसकी कार्य प्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। जान बूझकर कुछ आवासीय और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को रिकार्ड में दर्ज ही नहीं किया गया है।

ये है टैक्स का नियम
मुजफ्फरनगर। शासन ने व्यवसायिक भवनों पर जो टैक्स पॉलिसी निर्धारित की है उसके अनुसार जगह के सर्किल रेट और क्षेत्रफल को मीटर के हिसाब से गुणा करना है। बिलटप एरिया है तो क्षेत्रफल को नौ हजार से गुणा करना है। दोनों को जोड़कर जो टोटल आता है उसके पांच प्रतिशत में से दस प्रतिशत टैक्स के रूप में वसूल किया जाना है। शासन के इस नियम के हिसाब से इस समय पांच प्रतिशत टैक्स की वसूली भी नहीं हो पा रही है।

जांच को तीन सदस्य समिति गठित: डीएम
मुजफ्फरनगर। डीएम अजय शंकर पांडेय ने कहा कि कर निर्धारण में हो रही लापरवाही को देखते हुए इसकी जांच के लिए तीन सदस्य कमेटी गठित की गई है। इस समिति में वरिष्ठ कोषाधिकारी, तहसीलदार सदर एवं जिला पंचायत के लेखाकार को शामिल किया गया है। यह समिति कर निर्धारण के साथ पालिका में आने वाले किराए और विज्ञापन से होने वाली आय की समीक्षा भी करेगी। एक सप्ताह में समिति अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। पालिका के करों को लेकर हो रही लापरवाही पर दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
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