जान बचाने के लिए शामली में रहने लगा था किसान
जानसठ। गांव मीरापुर दलपत निवासी किसान प्रवेश सूदखोर इंद्रजीत से इतना खौफजदा था कि वह पैतृक गांव छोड़कर परिवार समेत शामली जनपद में रहने लगा था। करीब एक हफ्ते पूर्व ही फसल की देखभाल के लिए वह गांव लौटा था। यहां आने के बाद फिर से उसे जान का खतरा महसूस हुआ तो वह चौकी प्रभारी एसआई आदित्य भाटी से मिला। कार्रवाई नहीं हुई तो सीओ जानसठ के यहां बुधवार को सुरक्षा की गुहार लगाने जा पहुंचा, लेकिन इसके कुछ घंटे बाद ही उसकी हत्या कर दी गई।
प्रवेश की पत्नी पिंकी और मां रोहताश कली का कहना है कि यदि पुलिस ने उनकी शिकायतों को गंभीरता से लेकर कार्रवाई की होती तो प्रवेश की हत्या न होती। प्रवेश बुधवार रात खेतों में पानी चलाने गया था। देर रात मां उसे बुलाने पहुंची, लेकिन प्रवेश ने आने से इंकार कर दिया। बृहस्पतिवार सुबह किसान का शव नलकूप के पास स्थित खाली खेत में पड़ा मिला। किसान के पैर और हाथ पीठ पीछे बंधे हुए थे और गले में रस्सी का फंदा कसा हुआ था। सिर व चेहरे पर गंभीर चोटों के भी निशान थे। घटना की सूचना पर एसपी देहात नेपाल सिंह व सीओ जानसठ शकील अहमद टीम के साथ मौके पर पहुंचे और शव को मोर्चरी भिजवाते हुए पीड़ित परिजनों से घटना की जानकारी ली और शव को कब्जे मेें लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।
इनके खिलाफ दर्ज की गई रिपोर्ट
जानसठ। एसपी देहात नेपाल सिंह ने बताया कि प्रवेश हत्याकांड में उसकी पत्नी पिंकी ने गांव के ही आठ लोगों के खिलाफ नामजद तहरीर दी है। इनमें इंद्रजीत सिंह, अशोक, भूपेंद्र, सचिन, अवनीश उर्फ भूरा, अविनाश उर्फ मोनू, पिंटू और विकास शामिल हैं। सभी आरोपियों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर दी गई है। सभी आरोपी फरार हैं, जिनकी तलाश की जा रही है।
एसपी देहात को सौंपी जांच
मुजफ्फरनगर। एसएसपी अभिषेक यादव ने बताया कि मामले की जांच एसपी देहात नेपाल सिंह को दी गई है। हत्यारोपियों की गिरफ्तारी के लिए थाना पुलिस के साथ ही क्राइम ब्रांच को भी लगाया गया है। जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर वारदात का खुलासा कर दिया जाएगा। सीओ जानसठ शकील अहमद ने बताया कि किसान का गांव के ही इंद्रजीत से लेनदेन का विवाद था। पत्नी की तहरीर पर हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
तीन साल में सूदखोर लगाता रहा ब्याज पर ब्याज
प्रवेश ने करीब तीन साल पूर्व किसी काम के लिए गांव के ही इंद्रजीत से अपनी दो बीघा जमीन को बंधक रखकर 2.20 लाख रुपये लिए थे। आरोप है कि इंद्रजीत ने तीन साल के भीतर यह रकम 7.50 लाख रुपये करते हुए प्रवेश की बेशकीमती जमीन पर भी कब्जा कर लिया था।