निजीकरण के प्रस्ताव के खिलाफ लामबंद हुए अधिवक्ता
अधिवक्ताओं का कहना है कि ई-पंजीकरण व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपने का प्रस्ताव जनहित और अधिवक्ता हितों के विपरीत है। इसी प्रकार रजिस्ट्री कार्यालयों के निजीकरण का भी लगातार विरोध किया जा रहा है। प्रदर्शनकारी अधिवक्ताओं ने कहा कि यदि यह प्रस्ताव लागू किया गया तो इससे पारदर्शिता और व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
निबंधन कार्यालयों में रही तालाबंदी
विरोध के तहत अधिवक्ताओं ने निबंधन कार्यालयों में तालाबंदी कर दी, जिससे रजिस्ट्री से जुड़े कार्य प्रभावित रहे। हड़ताल के चलते न्यायालयों में भी नियमित कार्य प्रभावित हुआ। अधिवक्ताओं ने कहा कि प्रदेशभर में इसी मुद्दे को लेकर व्यापक आंदोलन चल रहा है और बड़ी संख्या में अधिवक्ता इसमें शामिल हैं।
मांगें न मानी गईं तो होगा बड़ा आंदोलन
अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर विचार नहीं किया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उन्होंने निजीकरण के प्रस्ताव को वापस लेने की मांग दोहराई।