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UP: 'दिवाकर' का इंसाफ-11 दोषियों को फांसी, पांच बड़े फैसले, न्यायाधीश रवि कुमार ने सुनाईं कठोर सजा

Thu, 02 Jul 2026 12:36 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर

सार

मुजफ्फरनगर की फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 के न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने छह अप्रैल से दो जुलाई 2026 के बीच पांच अलग-अलग मामलों में 11 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई। लगातार आए इन फैसलों से न्यायाधीश एक बार फिर चर्चा में हैं।
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न्यायधीश रवि कुमार दिवाकर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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'वह निकला था घर से, लौटने के वादे के साथ

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मगर लौट आया तिरंगे की छांव के साथ
जिस हाथ में कानून की ढाल थी
उस सीने पर चाकू का वार हुआ..... 
ये लाइनें मुजफ्फरनगर में छह साल पुराने होमगार्ड रतिराम हत्याकांड में फैसला सुनाते हुए न्याधीश रवि कुमार दिवाकर ने लिखीं। अदालत ने दोषी दीपक को मृत्युदंड की सजा सुनाई। वर्ष 2020 में बुढ़ाना मोड़ पर ड्यूटी के दौरान चाकू मारकर हमला किया गया था।

मुजफ्फरनगर की फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर लगातार आए अपने फैसलों के कारण एक बार फिर चर्चा में हैं। उन्होंने न केवल पीड़ितों में न्याय की उम्मीद को पंख दिए हैं बल्कि न्यायिक हलकों में लंबित फैसलों को लेकर चर्चा तेज कर दी है। 
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6 अप्रैल से 2 जुलाई 2026 के बीच उन्होंने पांच अलग-अलग हत्या के मामलों में 11 दोषियों को मृत्युदंड की सजा सुनाई। लगातार आए इन फैसलों ने प्रदेशभर में ध्यान आकर्षित किया है।

यह भी पढ़ें: Muzaffarnagar: होमगार्ड की हत्या में दोषी को फांसी, छह साल पुराने हत्याकांड में अदालत का बड़ा फैसला

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रवि कुमार दिवाकर इससे पहले वाराणसी में भी सुर्खियों में रहे थे। वर्ष 2022 में उन्होंने ज्ञानवापी परिसर में श्रृंगार गौरी के दैनिक दर्शन-पूजन और सर्वे से संबंधित प्रकरण में अधिवक्ता आयुक्त नियुक्त करने का आदेश दिया था। बाद में यह मामला उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचा। इसके बाद उनका तबादला बरेली हुआ, जहां उन्हें सुरक्षा संबंधी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा।

तीन महीने में पांच बड़े फैसले
पिछले करीब तीन महीनों में फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 ने पांच चर्चित हत्या के मामलों में कठोर फैसले सुनाए। इनमें लेन-देन के विवाद, अवैध संबंधों के शक और ड्यूटी के दौरान होमगार्ड की हत्या जैसे मामले शामिल हैं।

किन मामलों में सुनाई गई फांसी?
1. एडवोकेट समीर सैफी हत्याकांड (6 अप्रैल 2026)
15 अक्टूबर 2019 को 40 लाख रुपये के लेन-देन के विवाद में अधिवक्ता समीर सैफी की हत्या कर दी गई थी। अदालत ने सिंगोल अल्वी, सोनू उर्फ रिजवान और शालू उर्फ अरबाज को मृत्युदंड सुनाया। एक अन्य दोषी दिनेश को सात वर्ष के कारावास की सजा दी गई।

2. शेखर हत्याकांड (28 अप्रैल 2026)
भौराकलां थाना क्षेत्र के सिसौली निवासी शेखर की वर्ष 2019 में 70 हजार रुपये के लेन-देन के विवाद में हत्या कर दी गई थी। अदालत ने मुकेश, प्रदीप, संदीप और सोनू को मृत्युदंड सुनाया।

3. राजेश देवी और मासूम हिमांशु हत्याकांड (30 मई 2026)
चरथावल क्षेत्र में वर्ष 2011 में राजेश देवी और उनके बेटे हिमांशु की हत्या के मामले में अदालत ने दोषी रईस को मृत्युदंड की सजा सुनाई।

4. राजेंद्र सैनी हत्याकांड (20 जून 2026)
ककरौली निवासी राजेंद्र सैनी की वर्ष 2018 में हत्या कर शव को जलाने के मामले में अदालत ने रामकरण उर्फ सावन गिरी और गीलू को मृत्युदंड सुनाया। मामले के एक आरोपी वीरसैन की सुनवाई के दौरान मृत्यु हो चुकी थी।
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5. होमगार्ड रतिराम हत्याकांड (2 जुलाई 2026)
बुढ़ाना मोड़ पर वर्ष 2020 में गश्त के दौरान होमगार्ड रतिराम की चाकू मारकर हत्या करने के मामले में अदालत ने दोषी दीपक को मृत्युदंड की सजा सुनाई।

न्यायपालिका में चर्चा का विषय बने फैसले
लगातार कई गंभीर आपराधिक मामलों में सुनाए गए इन फैसलों के बाद न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर एक बार फिर चर्चा में हैं। हालांकि, भारतीय कानून के अनुसार मृत्युदंड का अंतिम क्रियान्वयन उच्च न्यायालय द्वारा पुष्टि के बाद ही संभव होता है।
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