राममंदिर आंदोलन के आगाज का साक्षी है मुजफ्फरनगर
मुजफ्फरनगर। अयोध्या में श्रीराम जन्म भूमि मुक्ति को लेकर देशभर में चले आंदोलन में मुजफ्फरनगर की अहम भूमिका रही। यहां से ही अयोध्या, मथुरा और काशी के स्थलों को अपने अधिकार में लेने के लिए पहली बार मंच से आवाज उठी और इसे बुलंद करने वाले थे कांग्रेस नेता दाऊ दयाल खन्ना। उनके साथ मंच पर मौजूद थे सरसंघ चालक रज्जू भैया और विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक सिंघल।
मार्च 1983 में राजकीय इंटर कॉलेज के मैदान में संपन्न हुए विराट हिंदू सम्मेलन के मुख्य संयोजक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तत्कालीन जिला प्रचारक और वर्तमान में प्रख्यात श्रीराम कथा वाचक विजय कौशल महाराज थे। उनके साथ संयोजक रहे उत्तर प्रदेश आयुष बोर्ड के चेयरमैन डा. सुभाषचंद शर्मा बताते हैं कि यह जनपद के सबसे बड़े सम्मेलनों में से एक था। राणा प्रताप के वंशज राणा भगवंत सिंह मुख्य वक्ता थे। मुरादाबाद की कांठ सीट से विधायक और प्रदेश केबिनेट में मंत्री रहे कांग्रेस नेता दाऊ दयाल खन्ना ने राम जन्म भूमि मुक्ति की आवाज उठाई थी। अन्य वक्ताओं ने उनकी इस आवाज को और बुलंद किया। यहीं से प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को पत्र लिखकर अयोध्या, काशी एवं मथुरा को हिंदुओं को सौंपने की मांग की गई थी। इसके बाद देशभर में हिंदू सम्मेलन हुए और अप्रैल 1984 को दिल्ली की धर्म संसद में राम जन्मभूमि के द्वार का ताला खुलवाने को जनजागरण यात्राएं शुरू करने का प्रस्ताव पारित किया गया।
20 दिन की तैयारी, जुटी लाखों की भीड़
- वर्ष 1983 के सम्मेलन में संस्कार भारती मेरठ प्रांत के उपाध्यक्ष महेंद्र आचार्य संयोजक मंडल में शामिल थे। उन्होंने बताया कि 20 दिन की तैयारी में हुए सम्मेलन में लाखों की भीड़ जुटी थी। बड़ी संख्या में संत समाज शामिल हुआ। कहीं कोई अव्यवस्था नहीं थी। यातायात व्यवस्था में अलग से लोग लगे थे। सभी प्लास्टिक के हेलमेट लगाए थे। सम्मेलन के लिए अनुमति लेने में भी बड़ी परेशानी हुई थी।
घर-घर से आए थे भोजन के पैकेट
सम्मेलन में जुटी लाखों की भीड़ के लिए घर-घर से भोजन के पैकेट आए थे। आरएसएस की परंपरा के अनुसार एक दिन पहले खाली पैकेट पहुंचाए गए और अगले दिन भोजन के पैकेट एकत्र किए गए। कई स्थानों पर पैकेट वितरण किए गए। एक लाख से ज्यादा भीड़ के बावजूद काफी संख्या में पैकेट बच गए थे ।
रामलीला मंचन कर रहे थे लोग
बड़ी तादाद में लोग ट्रैक्टर-ट्रालियों से सम्मेलन में आए थे। बहुत से राम, लक्ष्मण, हनुमान आदि का वेश धरे थे और रामलीला का मंचन करते आ रहे थे। महिलाएं पीली साड़ियां पहनकर श्रीराम के गीत गाती हुईं आई थी।
जेल के गए थे 350 से ज्यादा लोग
जीआईसी मैदान में हुए सम्मेलन के बाद राम मंदिर आंदोलन जोर पकड़ गया था। आंदोलन में जिले से 350 से ज्यादा लोग गिरफ्तार हुए। इनमें डा. सुभाषचंद शर्मा और महेंद्र आचार्य के अतिरिक्त अमरनाथ आचार्य, डा. सुरेश सिंघल, राजेंद्र कुमार नरूला, रघुवर दयाल, राजेश गुप्ता आदि शामिल थे। सभी को बुलंदशहर जेल में रखा गया। डा. शर्मा को एक माह 12 दिन तक जेल में रहना पड़ा था। उन पर दो हजार रुपये का ईनाम भी घोषित हुआ था।
सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की बेसब्री से प्रतीक्षा
राम जन्म भूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय की लोग अधीरता से प्रतीक्षा कर रहे हैं। डा. सुभाष चंद शर्मा कहते हैं कि हिंदू समाज निर्णय को लेकर सकारात्मक है। देश की न्याय व्यवस्था पर सबको विश्वास है।