डॉ. आयशा की फाइल फोटो।
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शामली के थानाभवन में डॉ. आयशा की दहेज के लिए हत्या के करीब नौ साल पुराने मुकदमे में दोषी पति डॉ. शहजान आसिफ को 15, ससुर सगीरुद्दीन, जेठ अमजद और देवर आरिफ को 10-10 साल कारावास की सजा सुनाई गई। अपर जिला एवं सत्र न्यायालय संख्या-आठ की पीठासीन अधिकारी नेहा गर्ग ने फैसला सुनाया।
मूल रूप से सहारनपुर के राजूपुर के रहने वाले और वर्तमान में शहर के अंबा विहार निवासी जब्बार हुसैन ने अपनी बेटी डॉ. आयशा की शादी 16 नवंबर 2015 को थानाभवन के डॉ. शहजान आसिफ के साथ की थी। कुछ दिन बाद ही ससुराल पक्ष की ओर से अतिरिक्त दहेज में रुपये और कार की मांग की जाने लगी।
विवाहिता ने अपने घर जानकारी दी। 16 नवंबर 2016 को आयशा का शव कमरे में फंदे पर लटका मिला । 17 नवंबर 2016 को मृतका के परिजनों ने पति शहजान आसिफ, ससुर सगीरुद्दीन, जेठ अमजद और देवर आरिफ के खिलाफ दहेज हत्या का मुकदमा दर्ज कराया। आरोप लगाया गया था कि हत्या को आत्महत्या दर्शाने का प्रयास किया गया है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया। मामले की सुनवाई अपर जिला सत्र न्यायालय संख्या-आठ में हुई। सोमवार को दोषियों को सजा सुनाई गई।