मुजफ्फरनगर में केंद्र सरकार तीन तलाक के बहाने मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड में दखलंदाजी कर रही है। तीन तलाक का मामला मुस्लिम समाज में कुरआन-ए-पाक और हदीस से जुड़ा है। इसमें कयामत तक तब्दीली नहीं की जा सकती है।
इस मामले में फलाहे इंसानियत सोसायटी ने तीन तलाक, पैगंबर मोहम्मद साहब पर सोशल मीडिया पर की जा रही टिप्पणी के विरोध में प्रदर्शन किया।
शहर में जामा मस्जिद हौज वाली में शुक्रवार को नमाज के बाद फलाहे इंसानियत सोसायटी के बैनर तले सैकड़ों मुस्लिम समाज के लोगों ने प्रदर्शन किया। वक्ताओं ने कहा कि संविधान सबको अपने-अपने धर्म का पालन करने की अनुमति देता है।
मुस्लिम पर्सनल लॉ भी मुस्लिम समाज के लिए कानून है। जो कुरआन-ए-पाक और हदीस पर आधारित है। ब्रिटिश हुकूमत के दौर से ही निकाह, तीन तलाक, खुला, विरासत आदि फैसले शरीअत के अनुसार ही होते आए हैं। केंद्र सरकार तीन तलाक के बहाने मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड में दखलंदाजी कर रही है। यह सही नहीं है।
वक्ताओं ने कहा कि सोशल मीडिया पर पैगंबर साहब पर टिप्पणी की जा रही है, इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन से मांग की गई कि तत्काल हुजूर की शान में गुस्ताखी करने वालों पर कार्रवाई करे। इसके अलावा भी म्यांमार में मुस्लिमों पर हो रहे अत्याचार की निंदा की गई।
इसके बाद राष्ट्रपति के नाम डीएम के माध्यम ज्ञापन भेजा गया। इस मौके पर सोसायटी के अध्यक्ष कारी मोहम्मद खालिद, आफताब कुरैशी, डॉ सलीमुहसन, महबूब आलम एडवोकेट, मौलाना मोहम्मद, मसीउल्ला, कारी नजर मोहम्मद, मोहम्मद हुजैफा, डॉ मुकर्रम अली, शहजाद अहमद आदि मौजूद रहे।