जिला कृषि एवं औद्योगिक प्रदर्शनी में आयोजित अखिल भारतीय मुशायरा गंगा-जमुनी तहजीब को समर्पित रहा। शायरों ने जहां राष्ट्र प्रेम से ओतप्रोत प्रस्तुति दी। वही, शायरोें ने सामाजिक व्यवस्था पर भी तंज कसे। कश्मीर से आए विशाल बाग ने लोगों को झकझोर देने वाला मुशायरा सुनाते हुए कहा- दिल तो कहता है यही दस्तूर होना चाहिए, सच के हाथों झूठ को मजबूर होना चाहिए।
श्रृंगार रस की प्रमुख हस्ताक्षर सबा बलरामपुरी ने पढ़ा- दौलत में जो नशे में यहां चूर हो गए, वो लोग मंजिलों से बहुत दूर हो गए। नदीम शाद देवबंदी ने कलाम पेश किया-बुलंदियों पर यकीनन यकीन रखता हूं, मगर मैं पांव के नीचे जमीन रखता हूं। आलोक श्रीवास्तव ने कुछ यूं पढा- गनीमत है शहर वालों लुटेरों से लुटे हो तुम, गांवों में तो अक्सर दरोगा लूट जाता है।
सिकंदर हयात गड़बड़ ने व्यवस्था पर हमला बोलते हुए कहा- नेता और पुलिस के सिपाही रोज नहाये गंगा में, फिर भी हमसे पूछ रहे गंगा मैली कैसे हुई। खतौली के शायर रियाज सागर ने राष्ट्र प्रेम को समर्पित शायरी की। उन्होंने पढ़ा आओ फिर एकता के दीपक यहां जलाएं, झगड़ों को खत्म करके सबको गले लगाए, मिलजुल कर आओ यारों एक जश्न यूं मनाए, मस्जिद को तुम सजाओ मंदिर को हम सजाएं।
अली बाराबंकी ने पढ़ा- आज चेहरे को दुपट्टे से छिपाना कैसा, ये है पर्दा तो फिर इस्लाम का पर्दा क्या है। बिलाल सहारनपुरी ने नेताओं को निशाने पर लिया- नेताओं ने तो आसानी से बना ली है कोठियां, देश ये उधार में उल्टा हुआ पड़ा।
फखरी मेरठी ने गरीब की बेबसी पर शायरी की। उन्होंने पढ़ा- मुनाफे की तमन्ना थी, मगर घाटा खरीदा है। लहू को बेचकर मजदूर ने आटा खरीदा है। बाजार में बढ़ती रही सिंदूर की कीमत, मेहंदी को तरसती रही मजदूर की बेटी।
हाशिम फिरोजाबादी ने देशभक्ति के ऐसे तराने सुनाए कि लोग वाह-वाह कर उठे। उन्होंने पढ़ा कि जो मेरे देश के हैं गद्दार, नहीं है जिनको इससे प्यार, वो हिंदुस्तान छोड़ दें। यहां की हर बेटी सीता है, यहां ही हर बेटी राधा है, यहां की हर बेटी मरियम है, सलमा है। यहां जो लुटे इनकी लाज, मौलाना हो या महाराज, वो हिंदुस्तान छोड़ दें।
देश के जाने माने शायर खुर्शीद हैदर ने पढ़ा अपने हिंदुस्तान को देखो शहरों के बाजारों में, भूखे बच्चे पत्ते चाटें, कुत्ते घूमे कारों में। नुसरत मेहंदी ने संजीदा शायरी की- हर कोई देखता है हैरत से, तुमने सबको बता दिया है क्या।
सरदार चरण सिंह बशर ने नोटबंदी पर पढ़ा जाल में घड़ियाल तो आया नहीं मगर, मछलियां मर गई बस ये खबर आम है। जौहर कानपुरी ने पढ़ा, हुआ शौक भी मेरा पूरा, अदा हुई एक सुन्नत भी। दुनिया भर ने कुत्ते पाले, मैने बकरी पाली है।
पॉपुलर मेरठी और मुइन शादाब ने भी शायरी की। अध्यक्षता जौहर कानपुरी और संचालन मुइन शादाब ने किया। संयोजक पैगाम-ए-इंसानियत के आसिफ राही रहे। उन्होंने सभी का आभार जताया। इससे पहले, कार्यक्रम का शुभारंभ पेपर मिल एसोसिएशन के चेयरमैन पंकज अग्रवाल, पूर्व विधायक सोमांश प्रकाश, चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल, भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत, अशोक अग्रवाल ने दीप प्रज्वलित कर किया। विधायक कपिलदेव अग्रवाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
एंट्री के मुख्य गेट पर रोशनी की कोई व्यवस्था नहीं
जिला कृषि एवं औद्योगिक प्रदर्शनी में पंडाल तक पहुंचने वाले मुख्य गेट पर पहले दिन से ही अंधेरा है। अंधेरे में ही एंट्री हो रही है। मुख्य गेट से लेकर पंडाल तक एक भी बल्ब नहीं है। प्रदर्शनी के कर्ता-धर्ताओं को इंतजार है कि यहां कोई घटना हो उसके बाद ही उजाला किया जाए।
प्रदर्शनी में पंडाल तक पहुंचने के लिए जो मुख्य द्वार बनाया गया है, उस पर पुलिस का पहरा तो लगा है, लेकिन रोशनी नहीं है। प्रदर्शनी से जुड़े अफसर रोज पंडाल जाते हैं और इसी अंधेरे से होकर गुजरते है, उन्होंने यह जहमत नहीं उठाई कि यहां पर भी उजाला किया जाए। पंडाल में रात्रि में प्रतिदिन कार्यक्रम होते हैं। सैकड़ों लोग यहां आते हैं। पूरी नुमाइश रोशनी से नहाई हुई है, लेकिन पंडाल के बाहर से लेकर मुख्य गेट तक का यह पूरा इलाका अंधेरे में है।
बारिश से मची अफरातफरी
मुजफ्फरनगर। नुमाइश में रात्रि में हुई बारिश से अफरातफरी का माहौल रहा। मुशायरे के चलते पंडाल पूरा भरा हुआ था। लोग पंडाल के बाहर खड़े होकर स्क्रीन पर मुशायरा देख रहे थे। अचानक बारिश प्रारंभ हुई तो नुमाइश में मौजूद और पंडाल के बाहर खड़े लोग सुरक्षित स्थान ढूंढने लगे, इससे अफरातफरी का माहौल बना रहा। पंडाल के बाहर से भीड़ को हटाने को लेकर कई बार पुलिस को लाठियां भांजनी पड़ी।