नगर पालिका परिषद में इन दिनों 24 करोड़ के कमीशन को लेकर जंग छिड़ी है। सत्ताधारी नेताओं और अफसरों की कमीशन पर नजर है। निर्माण विभाग में तैनात बाबुओं की कुर्सी भी इस जंग में लुढ़क गई है। मामला मंडलायुक्त तक पहुंचा तो उन्होंने पालिका के निर्माण कार्यों और अन्य शिकायतों पर जांच बैठा दी है।
नगर पालिका परिषद में बीते छह माह में विकास कार्यों के लिए 24 करोड़ का बजट आया है। अगले एक दो माह के अंदर उन सभी ठेकेदारों का भुगतान किया जाना है, जिन्होंने पालिका में कार्य किया है। पालिका में विकास कार्यों के लिए आए पैसे पर शुरू से ही सत्ताधारी नेताओं की नजर है। पालिकाध्यक्ष के हटने के बाद प्रशासक का कार्यभार ईओ पर है।
हालांकि पालिका में कमीशन की प्रथा नई नहीं है। चर्चा है कि एक जनप्रतिनिधि ने निर्माण विभाग में तैनात लिपिक प्रवीण, संजय, बिजेंद्र और ओमवीर का पांच दिन पूर्व ईओ को कहकर तबादला करा दिया। नगर पालिका कन्या इंटर कॉलेज में तैनात बाबू मनोज पाल और सुनील गर्ग को पालिका मुख्यालय से अटैच कर दिया। बिजेेंद्र को निर्माण से जलकल में भेजा है। कई और कर्मियों को इधर से उधर किया गया है।
पालिका में 55 बाबुओं में से 26 ही कार्यरत हैं। बाकी के पद खाली हैं। केवल निर्माण से जुड़े पटल बदले जाने से पालिका अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। पालिका में चल रहे इस खेल की शिकायत मंडलायुक्त दीपक अग्रवाल तक पहुंच गई है। पालिका में निर्माण कार्यों में हो रहे खेल और अन्य सभी शिकायतों की जांच के लिए सिटी मजिस्ट्रेट वैभव मिश्रा की अध्यक्षता में एक तीन सदस्यों की कमेटी बनाई गई है।
व्यवस्था सुधारने को बदले पटल
नगर पालिका ईओ विकास सैन ने बताया कि पालिका में जो पटल बदले गए हैं, यह सब व्यवस्था सुधारने के उद्देश्य से किया गया है। डीआईओएस ने एक पत्र भेजकर नगर पालिका में तैनात दो बाबुओं को हटाने के लिए कहा था। उन्हें हटाने के क्रम में ही निर्माण विभाग के लिपिक हटा दिए गए। जनप्रतिनिधियों के दबाव में पटल नहीं बदले गए हैं।