नदियों से अब यूं ही कोई मछली नहीं पकड़ पाएगा। प्रदेश सरकार ने पहली बार मत्स्य आखेट के लिए नदियों का ठेका देने के आदेश जारी किए हैं। जिले की पांच नदियों को चिह्नित कर लिया गया, जिनके ठेके की नीलामी तहसील स्तर पर की जाएगी। अब तक मछली पालन के लिए केवल तालाबों की नीलामी होती थी, लेकिन अब नदियों का भी ठेका दिया जाएगा। यह ठेका केवल संबंधित तहसील क्षेत्र की मत्स्य पालन समिति को ही दिया जा सकता है। नदी में केवल वही मत्स्य पालन समिति मछली पकड़ सकेंगी जिसने ठेका लिया है। जिले की पांच नदियों में तहसील स्तर पर ठेका देने की तैयारियां शुरू हो गई है।
इन नदियों का दिया जाएगा ठेका
सदर तहसील में बहने वाली सोलानी नदी की सात किमी लंबाई तथा पुरकाजी क्षेत्र की पुरानी नदी की छह किमी लंबाई तक ठेका दिया जाएगा। जानसठ क्षेत्र में किसी भी नदी का ठेका नहीं होगा, क्योंकि यह धार्मिक आस्थाओं से जुड़ा क्षेत्र है। इसके अलावा बुढ़ाना तहसील क्षेत्र में हिंडन की सरवट से रियावली तक लगभग 20 किमी लंबाई का ठेका होगा। कृष्णा नदी का सरनावली से बिराल तक 15 किमी का ठेका दिया जाएगा। इसके अलावा खतौली तहसील के गांव अंतवाड़ा में मात्र 500 मीटर लंबी अंतवाड़ा गांव की नदी का भी मछली पकड़ने का ठेका होना है। इन सभी नदियों के ठेके की नीलामी का खाका तैयार हो चुका है।
काली नदी में प्रदूषण, नहीं होगा ठेका
सदर तथा खतौली तहसील क्षेत्र में बहने वाली काली नदी का ठेका नहीं होगा। प्रदूषण के कारण इस नदी की स्थिति बेहद खराब है। सीवर से लेकर फैक्टरियों तक का पानी नदी में बह रहा है। इसलिए इसमें मछलियों के पनपने की उम्मीद ही नहीं है। कई स्थानों पर तो नदी में पानी नहीं है और कीचड़ से लबालब है। नदी में बहते काले पानी और बदबू के कारण आसपास का वातावरण भी दूषित रहता है।
इन्होंने कहा...
नदियों में मछली आखेट का ठेका दिया जाना है। यह ठेका जून से जुलाई माह तक होगा। तहसील स्तर पर ठेका देने की प्रक्रिया चल रही है। - आरके श्रीवास्तव, सहायक निदेशक मत्स्य।