कोर्ट में पेश होने पहुंचे सांसद और विधायक।
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वर्ष 2013 में हुए मुुजफ्फरनगर दंगे के एक मामले के आरोपी पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री एवं सांसद डॉ संजीव बालियान और बुढ़ाना विधायक उमेश मलिक शुक्रवार को प्रयागराज की विशेष एमपी, एमएलए कोर्ट में पेश हुए। दोनों के गैर जमानती वारंट जारी हो रखे थे। उन्होंने कोर्ट में पेश होकर 50-50 हजार रुपये की जमानत दाखिल करा कर वारंट रिकॉल कराए। कोर्ट ने उन्हें आठ फरवरी को फिर कोर्ट में पेश होने के आदेश दिए है। दोनों के अलावा पांच अन्य आरोपियों ने भी विशेष कोर्ट में पेश होकर वारंट रिकॉल कराए हैं।
साढ़े पांच साल पहले वर्ष 2013 में जानसठ क्षेत्र में हुए कवाल कांड के विरोध में नंगला मंदौड में 31 अगस्त और फिर सात सितंबर को महापंचायत का आयोजन हुआ था। 31 अगस्त की पंचायत में सांसद डॉ संजीव बालियान, विधायक उमेश मलिक आदि भी शामिल हुए थे। तीन सितंबर को पुलिस ने डॉ संजीव बालियान को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। सात सितंबर की पंचायत के बाद ही जिले में दंगा भड़क गया था।
तब शासन के आदेश पर सिखेड़ा थाने पर पंचायतों में शामिल हुए लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कराए थे। सांसद डॉ संजीव बालियान, विधायक उमेश मलिक आदि के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया था। यह मुकदमा जिला कोर्ट में लंबित था। करीब तीन माह पहले सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एमपी और एमएलए के मुकदमों की त्वरित सुनवाई के लिए प्रयागराज में विशेष कोर्ट का गठन हुआ था।
जिले से सभी जनप्रतिनिधियों के करीब 37 मुकदमे प्रयागराज की विशेष कोर्ट को भेज दिए गए थे। उधर, एमपी डॉ संजीव बालियान और बुढ़ाना विधायक उमेश मलिक आदि के कोर्ट में पेश नहीं होने पर गैर जमानती वारंट भी हो गए थे। शुक्रवार को विशेष कोर्ट में तारीख होने पर सांसद डॉ संजीव बालियान और विधायक उमेश मलिक ने न्यायाधीश पवन कुमार तिवारी की विशेष कोर्ट में पेश हुए। उन्होंने 50-50 हजार की जमानत दाखिल करा कर वारंट रिकॉल कराए। इनके अलावा बिट्टू सिखेड़ा, पूर्व ब्लाक प्रमुख वीरेंद्र सिंह, श्यामपाल चेयरमैन, जयप्रकाश शास्त्री आदि ने भी विशेष कोर्ट में पेश होकर वारंट रिकॉल कराए।