शहीद मनोज को सलामी देते सीआरपीएफ के जवान।
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मनोज कुमार की शहादत पर पूरे गांव में गम का माहौल है। दो दिन से लोग काम-धंधे बंद कर रणबांकुरे के अंतिम दर्शन का इंतजार कर रहे थे। रिश्तेदार, नेता, अफसर हर कोई मनोज की शहादत को सलाम कर रहा था। सोमवार को हुई घटना के बाद बुधवार को शव का अंतिम संस्कार हुआ। पहले पति और अब बेटे का दुनिया से जाना मां के लिए बेहद दुखदायी रहा।
छत्तीसगढ़ के सुकमा में नक्सली हमले में वीरगति को प्राप्त हुए भोपा के निरगाजनी निवासी मनोज कुमार की शहादत की जानकारी जैसे ही उसके घर पहुंची, पैरों के तले से जमीन खिसक गई। यह सुनकर मां राजेश का कलेजा बैठ गया। घर में रोने-बिलखने की आवाज गूंजने लगी। इसके बाद ग्रामीणों और रिश्तेदारों का जमावड़ा शहीद के घर के बाहर जुटना शुुरू हो गया। शहीद की शहादत में शामिल होने के लिए सोमवार रात से लोग खड़े इंतजार करते रहे।
मंगलवार देर रात जैसे ही पार्थिव शरीर को लेकर सीआरपीएफ के जवान गांव पहुंचे मां और बहनों की चीत्कार से हर किसी की आंखें नम हो गईं। छह वर्ष पूर्व आज के ही दिन पति को खोने वाली मां के बेटे का शव घर पहुंचा तो उसका विलाप देखकर हर कोई रो उठा। गांव की कोई गली ऐसी नहीं थी, जहां भीड़ न हो। गांव की गलियों में भीड़ मनोज की याद में नारे लगा रही थी। गली, घेर, चबूतरे, मकानों की छतों पर लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। कई दलों के नेता, अफसर, समाजसेवी सभी ने नम आंखों से मनोज को याद किया। गांव के लाडले को खोने का गम ग्रामीणों के चेहरे पर साफ दिख रहा था। निरगाजनी में दो दिन तक ग्रामीणों ने कोई काम-धंधा नहीं किया।