प्रेस वार्ता करते बैंक इंप्लाइज यूनियन के पदाधिकारी।
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यूपी बैंक इंपलाइज यूनियन ने लोगों के पास करोड़ों रुपये के नए नोट पहुंचने के मामले में आरबीआई के अधिकारियों की मिलीभगत होने का आरोप लगाया है। आरबीआई ने नेशनलाइज बैंकों से ज्यादा पैसा प्राइवेट बैंकों को जारी किया। उधर, नकदी के संकट में बैंककर्मी जनता से पिटते रहे। पूरे मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए। बैंकों में नकदी का संकट खत्म नहीं हुआ तो बैंककर्मी हड़ताल को मजबूर होंगे।
यूपी बैंक इंपलाइज यूनियन के जिलाध्यक्ष आरपी शर्मा, चेयरमैन मुकेश भार्गव, उपाध्यक्ष अशोक शर्मा, बीके सूर्यवंशी, सचिव तेजराज गुप्ता, कोषाध्यक्ष रविंद्र सिंह, राजीव जैन ने पत्रकार वार्ता में कहा कि हमारे जिले में ही सबसे ज्यादा बैंक और खाते पीएनबी के हैं। पीएनबी को मात्र 64 करोड़ मिला है। एक्सिस बैंक की शाखा और खाते नाम मात्र हैं उसे 80 करोड़, एचडीएफसी को 70 करोड़, एसबीआई को 150 करोड़ मिला है। आरबीआई से प्राइवेट बैंकों को इतना पैसा किस आधार पर जारी हुआ। सरकारी बैंकों के मैनेजर गांवों में पिट रहे हैं। हम लोगों ने शुरुआत में भ्रष्टाचार के खिलाफ इस लड़ाई में ऐसे काम किया, जैसे सैनिक सीमा पर लड़ता है। सरकार हम ही लोगों को बेईमान घोषित करने में लगी है।
सराफा बाजार में सत्तर प्रतिशत पर पैसे बदले जा रहे हैं। आरबीआई अफसरों से सीधे संबंध के आधार पर पैसा बदला जा रहा है। प्राइवेट बैंक भी इसमें शामिल है। भारत सरकार पूरे मामले की सीबीआई जांच कराए। सरकार जितना पैसा देश में बता रही थी उतना पैसा जमा हो गया है। भारत सरकार की सोच उलट साबित हुई है। नेशनलाइज बैंकों को पैसा नहीं मिला तो हम काम नहीं करेंगे। बैंककर्मी हड़ताल पर चले जाएंगे। हम अब और धैर्य रखने की स्थिति में नहीं हैं।
बैंककर्मियों ने वित्त मंत्री को भेजे ज्ञापन में में कहा है कि बैंकों में पर्याप्त नकदी भेजी जाए। एटीएम को अविलंब चालू किया जाए। नकदी आपूर्ति के भेदभाव को समाप्त किया जाए। बाजार में प्रभावशाली लोगों के पास अधिक मात्रा में आई नई करेंसी की सीबीआई जांच की जाए। नोटबंदी के कारण जिन लोगों की, बैंक के ग्राहक एवं बैंक स्टाफ की मृत्यु हुई है, उन्हें मुआवजा दिया जाए। बैंकों में अधिकारियों और कर्मचारियों को सुरक्षा दी जाए। देर रात तक काम करने वाले कर्मचारियों को अतिरिक्त पारिश्रमिक दिया जाए।