मुस्लिम और दलित समीकरण के सहारे चुनाव जीतने का बहनजी का ख्वाब टूट गया है। ‘सर्वजन हिताय- सर्वजन सुखाय’ का नारा भी मतदाताओं को लुभा नहीं पाया। सोशल इंजीनियरिंग के दम पर वर्ष 2012 में जिले में तीन सीटों पर बसपा ने जीत हासिल की थी। इस बार चुनावी नतीजों में बसपा के प्रत्याशी तीसरे और चौथे स्थान पर खिसक गए।
बसपा सुप्रीमो मायावती का दलित-मुस्लिम मतों के ध्रुवीकरण का सपना बिखर गया है। बहनजी ने बुढ़ाना, मीरापुर और चरथावल में मुस्लिम प्रत्याशियों को टिकट दिया, ताकि डी-एम समीकरण के दम पर भाजपा और सपा-कांग्रेस गठबंधन को हराया जा सके। बसपा सोशल इंजीनियरिंग का फार्मूला भूल कर नए समीकरण में जीत का ताना बाना बुनने में लगी रही। चुनाव परिणाम सामने आए तो मुस्लिमों की पसंद सपा ही रही। हर सीट पर सपा प्रत्याशियों को मुस्लिम मतदाताओं ने बंपर वोट दिए। बसपा ने अपनी जीती हुई तीन सीटें भी गवां दी हैं।
बुढ़ाना में पूर्व सांसद कादिर राना की पत्नी सईदा बेगम, चरथावल से निर्वतमान विधायक नूरसलीम राना और मीरापुर से नवाजिश आलम को करारी शिकस्त झेलनी पड़ी। बहनजी ने मीरापुर के निवर्तमान विधायक मौलाना जमील अहमद का टिकट काट कर पार्टी में आए नवाजिश को प्रत्याशी बनाया था। जिले की सभी छह सीटों पर बसपा के उम्मीदवार तीसरे और चौथे स्थान पर खिसक गए।
वर्ष 2012 के चुनाव में बसपा के खाते में मीरापुर, चरथावल और सुरक्षित सीट पुरकाजी गई थी। पूर्व राज्य सभा सांसद राजपाल सैनी खतौली सीट पर अपने बेटे शिवान सैनी को बसपा के टिकट पर चुनाव नहीं जीता पाए है। लगातार दो चुनाव में बसपा के टिकट पर एमएलए बने अनिल कुमार की किस्मत भी अबकी बार रूठ गई। वर्ष 2007 में चरथावल और 2012 में पुरकाजी सीट से अनिल जीते थे।
नतीजों से बसपा में छाई निराशा
नतीजों से बसपा में निराशा छाई है। बसपा प्रत्याशियों में पुरकाजी से अनिल कुमार को 46401, मीरापुर में नवाजिश आलम को 39689, सदर सीट पर राकेश शर्मा को 21038, बुढ़ाना में सईदा बेगम को 30034, चरथावल से नूर सलीम राना को 47563, खतौली से शिवान सैनी को 37380 मत मिलेे है। बुढ़ाना में सईदा बेगम चौथे स्थान पर रहीं।