मार्च की बारिश ने तोड़ा 25 साल का रिकार्ड
मुजफ्फरनगर। मौसम ने बीते 25 साल का रिकार्ड ध्वस्त कर दिया। पहली बार ऐसा हुआ है जब मार्च माह में बारिश की झड़ी लगी है। मार्च 2015 में सात दिन बारिश हुई और 2006 में चार दिन बारिश हुई। बाकी में एक या दो दिन ही बारिश हो पाई। तीन वर्ष तो ऐसे भी आए जब मार्च माह में एक बूंद भी वर्षा नहीं हुई। मार्च 2020 का आधा महीना भी नहीं हुआ और बारिश के आठ दिन हो गए है।
मार्च में जुलाई माह जैसी बारिश पहली बार देखने को मिल रही है। लोग हैरान है कि होली के बाद भी मौसम नहीं बदल पाया। गर्म कपड़ों में ही लोगों ने होली खेली। अमूमन होली के बाद गर्म कपड़ों को संदूक में रख दिया जाता था। इस बार होली के बाद भी सर्दी बनी हुई है। मार्च माह के 25 साल के इतिहास में कभी भी सात दिन से अधिक बारिश नहीं हुई है। गन्ना शोध संस्थान के मौसम विभाग के रिकार्ड के अनुसार 2015 में सात दिन बारिश हुई थी, इस बार मार्च माह के 13 दिन में आठ दिन बारिश हो चुकी है। अभी पूरा माह बाकी है। साल 2004, 2008 और 2010 ऐसे भी गए हैं जिनमें बारिश हुई ही नहीं। प्रति वर्ष का जो औसत है वह एक या दो दिन बारिश का ही रहा है।
मार्च में ऐसी बरसात नहीं देखी
गन्ना शोध संस्थान के मौसम विशेषज्ञ पान सिंह का कहना है कि बीते 35 साल से रिकार्ड रख रहे हैं। इस तरह की झड़ी मार्च माह में अब से पहले कभी नहीं लगी। अभी 13 दिन हुए हैं और आठ दिन बारिश हो चुकी है। यह हाल तो बरसात में रहता है।
मार्च में बारिश का आंकड़ा
वर्ष बारिश दिन
मार्च 1995 15.6 एमएम दो दिन
मार्च 1996 12.2 एमएम एक दिन
मार्च 1997 70.6 एमएम तीन दिन
मार्च 1998 4.2 एमएम एक दिन
मार्च 1999 6.6 एमएम एक दिन
मार्च 2000 23.2 एमएम दो दिन
मार्च 2001 8.6 एमएम एक दिन
मार्च 2002 10.6 एमएम एक दिन
मार्च 2003 शून्य शून्य
मार्च 2004 43.0 एमएम तीन दिन
मार्च 2005 129.6 एमएम चार दिन
मार्च 2006 32.2 एमएम एक दिन
मार्च 2007 शून्य शून्य
मार्च 2008 10.2 एमएम एक दिन
मार्च 2009 शून्य शून्य
मार्च 2010 18.0 एमएम एक दिन
मार्च 2012 18.5 एमएम दो दिन
मार्च 2013 10.6 एमएम एक दिन
मार्च 2014 25.6 एमएम दो दिन
मार्च 2015 114.0 एमएम सात दिन
मार्च 2016 40.4 एमएम दो दिन
मार्च 2017 18.0 एमएम एक दिन
मार्च 2018 18.0 एमएम दो दिन
मार्च 2019 4.4 एमएम एक दिन
मार्च 2020 63.4 एमएम आठ दिन