दीवार में छेद कर निकाला जा रहा था दूषित पानी
मुजफ्फरनगर। दीवार में छेद बनाकर सर शादीलाल डिस्टलरी मंसूरपुर से दूषित पानी की निकासी हो रही थी। छेद से एक पाइप के जरिए इस पानी को नाले में डाले जाने की बात सामने आई है और इससे काली नदी भी प्रदूषित हो रही थी। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच में पानी को बेहद दूषित पाया गया है। इस रिपोर्ट के आधार पर मुख्य पर्यावरण अधिकारी एनके चौहान के आदेश पर डिस्टलरी के प्लांट का सील किया है।
डीएम और क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी के पास बोपाड़ा, खानूपुर और मिल मंसूरपुर के ग्रामीणों की शिकायत मिली थी। जिसमें ग्रामीणों ने बताया था कि डिस्टलरी से दूषित पानी नाले में डाला जा रहा है, जबकि जबकि फैक्टरी जेएलडी (जीरो लिक्विड डिस्चार्ज) श्रेणी की है। शिकायत पर क्षेत्रीय अधिकारी अंकित सिंह ने तीन बार निरीक्षण किया। जिसमें दो बार रात में जाकर डिस्टलरी की जांच की, वहां नाली में भारी मात्रा में अशुद्धिकृत उत्प्रवाह प्रवाहित होता पाया गया। जांच पड़ताल के दौरान पाया गया कि फैक्टरी से बाउंड्री वाल में छेद बना कर एक पाइप से रंगीन दूषित पानी को नाली में डाला जा रहा है, यह नाली मंसूरपुर नाले में मिलती है और यहां से दूषित पानी बोपाड़ा में काली नदी में मिलता है, जिससे नदी भी प्रदूषित हो रही है। टीम ने मौके से पानी के नमूने लेकर जांच की। सहायक वैज्ञानिक डीसी पांडे के अनुसार पानी में पीएच-4.9, सीओडी -3200 एमजी प्रति लीटर, टीएसएस-1600 एमजी प्रति लीटर की मात्रा पाई गई, जो मानकों से अधिक है। क्षेत्रीय अधिकारी ने बताया कि इसकी रिपोर्ट लखनऊ मुख्यालय को भेजी गई, जहां से डिस्टलरी को बंद कराने के आदेश मिले थे।
नाले में पानी बहाए जाने पर फिर जांच को पहुंची टीम
मुजफ्फरनगर। मंसूरपुर डिस्टलरी के प्लांट को सील किए जाने भी शुक्रवार को नाले में पानी बहाए जाने की शिकायत प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को मिली। जिस पर टीम ने मौके पर जाकर जांच पड़ताल की। पहले डिस्टलरी के अंदर उस छेद को जांचा, जहां से पहले पानी निकाला जाता था, इसके बाद बाहर नाले की जांच पड़ताल की गई। फैक्टरी परिसर में काफी मात्रा में पानी भरा मिला है। क्षेत्रीय अधिकारी ने बताया कि टीम को छेद से पानी की निकासी होती नहीं मिली है। अंदर की नाली भी सूखी मिली है। बाहर नाले में पानी बहता मिला है, जो शुगर मिल की ओर से आ रहा था। प्लांट में शीरे की सप्लाई बंद कर सील लगाई गई है, इसलिए 48 घंटे तक बॉयलर चलेगा। इसके बाद उसे भी बंद कराया जाएगा। यहां पर निगरानी के लिए टीम को छोड़ दिया गया है।
डिस्टलरी में 142 कर्मचारी पहुंचे
मुजफ्फरनगर। मंसूरपुर डिस्लटरी में 320 कर्मचारी काम करते हैं। प्लांट सील किए जाने पर अंदर उत्पादन का कार्य बंद हो गया है, जबकि बाटलिंग का कार्य चल रहा है। दफ्तर में भी काम हो रहा है। शुक्रवार को 142 कर्मचारी ड्यूटी पर आए। इन कर्मचारियों ने बोटलिंग और पैकिंग का कार्य किया।
डिस्टलरी परिसर में भरा है प्रदूषित पानी
मुजफ्फरनगर। नियमों के अनुसार मंसूरपुर डिस्टलरी में किसी भी प्रकार का पानी फैक्टरी से बाहर नहीं जाना चाहिए। वेस्ट इंसीनेटर बॉयलर और ईटीपी के द्वारा पानी का शुद्धिकरण होकर वह जमीन में जाना चाहिए, इसके बावजूद डिस्टलरी परिसर में भारी मात्रा में प्रदूषित पानी भरा है, हालांकि प्रबंध तंत्र इसे बारिश का पानी बता रहा है।
सैनिटाइजर का उत्पादन भी बंद
मुजफ्फरनगर। मंसूरपुर डिस्टलरी में सैनिटाइजर का भी उत्पादन होता है, जो प्लांट सील होने से बंद हो गया है। प्लांट सील होने से एथनॉल का उत्पादन नहीं हो पाया, इसी कारण स्प्रीट भी बननी बंद हो गई। डिस्टलरी में रोजाना करीब तीन हजार लीटर सैनिटाइजर का उत्पादन होता है, जो शुक्रवार से बंद हो गया है। हालांकि अभी फैक्टरी में करीब 50 हजार लीटर सैनिटाइजर का स्टॉक है।
डिस्टलरी से दूषित पानी बहाए जाने और पानी की जांच मानको के विपरीत आने पर लखनऊ बोर्ड के आदेश पर प्लांट सील की कार्रवाई की गई है। 21 जुलाई से रोजाना तीस हजार का जुर्माना भी लगाया गया है। आगामी 48 घंटे में बॉयलर को भी बंद करा दिया जाएगा। यदि अब भी पानी बहाया गया तो मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। - अंकित सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी, उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, मुजफ्फरनगर