लॉकडाउन ने तोड़ी कमर, किस्त नहीं चुका पा रहे ऋण धारक
मुजफ्फरनगर। जिले में होम लोन के लगभग 15 हजार खाताधारक हैं, जिन्होंने बैंकों से लगभग एक हजार करोड़ लिया हुआ है। इसमें पांच प्रतिशत खाते एनपीए में जा सकते हैं। कोरोना काल के चलते केंद्र सरकार ने होम लोन की किस्त में 31 अगस्त तक छूट दी थी। अब आगे छूट नहीं मिलने के कारण उन निजी कंपनियों के कर्मचारियों के सामने किस्त चुकाने का संकट खड़ा हो गया है, जिनके वेतन में कटौती कर दी गई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश से जरूर कुछ राहत मिली है।
ग्रामीण अंचल में जिले का सबसे बड़ा बैंक पंजाब नैशनल बैंक है। इसकी जनपद में 38 ब्रांच हैं, इनके होम लोन के 1300 ग्राहक भी नहीं हैं और इनका व्यापार 150 करोड़ से भी कम है। शहर में केवल एक ही शाखा वाला एचडीएफसी बैंक इनसे ज्यादा दो हजार से अधिक उपभोक्ताओं को होम लोन दे चुका है। इनका व्यापार भी 300 करोड़ के आसपास है। एचडीएफसी की होम लोन की शाखा के अंकुर कुमार का कहना है कि उनके अधिकतम लोन सरकारी नौकरी वालों के हैं। कोरोना के बीच में भी उनकी किस्त लगातार जमा हुई है, जो एक दो प्रतिशत ग्राहक रह जाता है, जो इकट्ठा किस्त जमा कर देते हैं। होम लोन में जिले में एसबीआई पहले स्थान पर है। इस बैंक की रेलवे रोड स्थित मुख्य शाखा में सबसे ज्यादा होम लोन हैं। जिले में इनके ग्राहकों की संख्या भी लगभग दो हजार है और इनका व्यापार 300 करोड़ से ऊपर है। इलाहाबाद बैंक अब इंडियन बैंक में मर्ज हो चुका है। शहर में इसकी चार शाखाएं है। इन चारों में लगभग 500 होम लोन के उपभोक्ता हैं। इसके अलावा बैंक ऑफ बड़ौदा, केनरा बैंक, जिला सहकारी बैंक, यूनियन बैंक, सिंडिकेट बैंक आदि से होम लोन लिए गए हैं। जिले में होम लोन के कुल उपभोक्ताओं की संख्या लगभग 15 हजार है और एक हजार करोड़ से अधिक इन लोगों ने होम लोन के रूप में लिया हुआ है।
किस्त जमा करना चुनौती बना
एक निजी कंपनी में नौकरी करने वाले अक्षय कुमार का कहना है कि उसकी किस्त निरंतर जमा हो रही थी। अब कंपनी ने उनका वेतन आधा कर दिया है। ऐसी स्थिति में किस्त जमा करना उसके लिए चुनौती बन गया है। सरकार ने 31 अगस्त तक जो छूट दी थी उससे बड़ी राहत मिली थी। अब टेंशन इस बात को लेकर है कि किस्त किस प्रकार जमा होगी।
गांवों में ठिठकी होम लोन की स्कीम
मुजफ्फरनगर। जिले में होम लोन की स्कीम ग्रामीण अंचल में ठिठक गई है। बैंक पुश्तैनी जमीनों पर लोन नहीं देता है। जमीन के कागज मांगता है। दूसरे गांव में नक्शा स्वीकृत कराने को लेकर समस्या सामने आती है। ऐसी स्थिति में जिले के ग्रामीण अंचल के बैंकों की शाखाओं में होम लोन की संख्या शून्य तक है। गांव में होम लोन लेने में बड़ी दिक्कत है। गांव जसोई के विजयपाल का कहना है कि सरकारी नौकरी होने के बाद भी बैंक होम लोन नहीं दे रहा है। घर की जमीन के कागज मांगते हैं। पुश्तैनी जमीन के कागज कहां से लाएं।
पांच प्रतिशत से ज्यादा डिफाल्टर नहीं
मुजफ्फरनगर। एलडीएम अमित बुंदेला का कहना है कि होम लोन अधिकतम सरकारी नौकरी वालों या किसी प्राइवेट कंपनी में अच्छी नौकरी करने वालों को ही मिलता है। होम लोन में डिफाल्टर की संख्या सबसे कम है। पांच प्रतिशत से ज्यादा डिफाल्टर नहीं हैं। बैंक के पास प्रापर्टी के बंधक होने से इसमें बैंक को ज्यादा नुकसान नहीं होता है। गांवों में जमीन की स्थिति क्लियर नहीं होने के कारण होम लोन देने में दिक्कत आती है।