मुजफ्फरनगर। अंकित विहार निवासी पलक शर्मा ने क्रिकेटर बनने का सपना अपनी आंखों में बचपन से ही संजोया था। खेल के दौरान लिंगामेंट इंजरी सफलता की राह में बाधा बनकर खड़ी हो गई। हॉकी खिलाड़ी रहे पिता के हौसले से वह आगे बढ़ी और महिला अंपायर बनने का फैसला लिया। आज वह मैदान पर विकेट, रन, मैच और खिलाड़ियों की हर गतिविधि पर पैनी नजर रख रही हैं। इसके साथ ही स्टेडियम में जिले की महिला खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए खेल की बारीकियां भी सिखा रही हैं।
मूल रूप से चरथावल निवासी उनके पिता मनोज शर्मा हॉकी के राज्यस्तरीय खिलाड़ी रहे हैं। पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण उन्हें अपने खेल करियर को विराम देना पड़ा, लेकिन उन्होंने अपने अधूरे सपनों की विरासत अपनी तीनों बेटियों को सौंप दी। सबसे छोटी बेटी पलक शर्मा ने पिता के सपनों को उड़ान देने का संकल्प लिया। 11वीं कक्षा में राज्यस्तरीय प्रतियोगिता तक पहुंच गईं।
इसी दौरान प्रैक्टिस के समय हुई लिंगामेंट इंजरी के बाद डॉक्टरों ने क्रिकेट खेलने से मना कर दिया। शारीरिक और मानसिक चुनौतियों से जूझते हुए उन्होंने जिले से लेकर राज्य स्तर तक अंपायरिंग की कठिन परीक्षाएं उत्तीर्ण कीं। प्रथम श्रेणी में बीपीईएस, बीपीएड और एमपीएड की शिक्षा पूरी कर चुकी हैं। फिलहाल वह उत्तरप्रदेश प्रदेश में आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में अंपायरिंग की जिम्मेदारी संभाल रही हैं।
अलग अलग पिच टीम के लिए चुनौती
टी-20 महिला वर्ल्ड कप को लेकर वह बहुत उत्साहित हैं। उनका कहना है कि भारतीय महिला क्रिकेट टीम पूर्व के मैचों में अपना शानदार प्रदर्शन कर चुकी हैं। इस टूर्नामेंट में वह भारत का नाम रोशन करेगीं। इंग्लैंड की अलग-अलग पिचें सभी टीमों के लिए चुनौती पेश करेंगी। इसमें जो टीम परिस्थितियों के अनुरूप खुद को सबसे जल्दी ढाल लेगी, वही खिताब की प्रबल दावेदार बनेगी।