चरथावल। बुड्ढ़ाखेड़ा गांव में अनोखी मिसाल कायम हुई। दूल्हे ने दहेज के रूप में मिली 3.50 लाख रुपये की नकदी यह कहकर लौटा दी कि दुल्हन स्वयं ही सबसे बड़ा धन होती है। दूल्हे का सराहनीय कदम दहेज प्रथा जैसी कुरीतियों पर जोरदार प्रहार है। इसके बाद दूल्हे प्रवीण ने दुल्हन रश्मि पंवार का हाथ थामा और शादी के बाद वापस लौट गए।
रविवार रात को सहारनपुर के नानौता क्षेत्र के गांव संभलहेड़ी से प्रवीण की बरात बुड्ढ़ाखेड़ा गांव पहुंची। गांव में मेहमानों का जमघट लगा था और हर तरफ खुशी का माहौल था। पंडित की ओर से गोरे की रस्म (विवाह का एक संस्कार) संपन्न कराया जा रहा थी। इसी रस्म के दौरान दुल्हन पक्ष की ओर से दूल्हे को 3.50 लाख रुपये नकद भेंट किए गए। जब दूल्हे के हाथ में रुपये रखे गए, तो उन्होंने विनम्रता से हाथ जोड़कर उन्हें वापस कर दिया। दूल्हे ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह किसी भी प्रकार का धन लेकर अपनी शादी को नहीं जोड़ना चाहते। दूल्हे के इस निर्णय से दुल्हन पक्ष के लोग अभिभूत हुए और उनकी सराहना की।
समाज में जागरूकता और प्रेरणा का संदेश
दूल्हे प्रवीण की इस पहल की चर्चा पूरे क्षेत्र में हो रही है। ग्रामीण अनंगपाल और नीरज पुंडीर का मानना है कि दूल्हे का यह निर्णय दहेज प्रथा जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ एक सशक्त संदेश है। इस तरह के कदम युवाओं में दहेज उन्मूलन के प्रति जागरुकता बढ़ाएंगे और समाज के लिए एक प्रेरणादायक मिसाल पेश करेंगे। यह घटना दिखाती है कि आज भी ऐसे लोग हैं जो अपनी सोच और कार्यों से समाज को बेहतर दिशा दे सकते हैं।