आत्महत्या रोकने के लिए लाइफ स्किल ट्रेनिंग
मुजफ्फरनगर। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जनजागरूकता एवं छात्र-छात्राओं में बढ़ रही आत्महत्या के नियंत्रण एवं मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता के लिए स्कूलों के नोडल अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया। जिले के 35 सरकारी एवं 35 अर्द्धसरकारी विद्यालयों के नोडल अधिकारियों को ट्रेनिंग में शामिल किया गया। जिला मानसिक स्वास्थ्य इकाई टीम ने इन सभी को लाइफ स्किल ट्रेनिंग दी।
कार्यशाला में सीएमओ डॉ पीएस मिश्रा ने कहा कि मानसिक रोग छुआछूत से नहीं फैलता, यह रोग फैलने वाली बीमारी नहीं है। यह बीमारी किसी को भी हो सकती है, यहां तक की बच्चे भी इससे अछूते नहीं है। छात्र-छात्राओं में बढ़ रही आत्महत्या की प्रवृति चिंतन का विषय है। इसके रोकथाम को शासन ने पहल की है। प्रत्येक विद्यालयों से अध्यापकों का चयन कर उनको मानसिक विद्या में प्रशिक्षित करके विद्यालय स्तर पर बढ़ती आत्महत्या की प्रवृत्ति को रोकने का प्रयास कर रहे हैं। कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ बीके ओझा ने बताया कि छात्र-छात्राओं में बढ़ रही आत्महत्या नियंत्रण को एवं मानसिक स्वास्थ्य में जागरूक करने को 35 सरकारी एवं 35 अर्द्धसरकारी विद्यालयों के अध्यापकों को नोडल अधिकारी नामित किया गया है, जिनको प्रशिक्षण दे दिया गया है। ये सभी अध्यापक 10 अक्तूबर को अपने-अपने विद्यालय में छात्र-छात्राओं को लाइफ स्किल ट्रेनिंग प्रदान करेंगे तथा उनको विशेष परामर्श भी देंगे।
मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के साइकोथेरेपिस्ट मनोज कुमार, प्रशिक्षण कार्यक्रम में पीपीटी प्रजेंटेशन द्वारा विस्तारपूर्वक मानसिक स्वास्थ्य के बारे में बताया गया। उन्होंने कहा कि विश्व में कुल आत्महत्या करने वाले लोगों में 17 प्रतिशत लोग भारतीय हैं। प्रत्येक 40 सेकेंड में एक व्यक्ति आत्महत्या कर रहा है। भारत में सर्वाधिक आत्महत्या करने में 6.7 प्रतिशत विद्यार्थियों की संख्या है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में किशोरों में आत्महत्या की बढ़ रही प्रवृत्ति तथा जीवन के प्रति निराशा को दूर करने की जरूरत है। इसके लिए लाइफ स्किल प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है, जिसको निरंतर जारी रखा जाएगा। प्रशिक्षण कार्यक्रम में डॉ वीके सिंह, डॉ प्रवीण चोपड़ा, डॉ लोकेश गुप्ता, डॉ घनश्याम दास, डॉ पंकज कुमार, कपिल आत्रेय, रवि कुमार, शशि बाला, अशोक कुमार, पूनम मौजूद रहे।