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तेंदुए के डर के चलते गांव में रिश्तेदारों का भी आना बंद

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ककरौली के गांव दौलतपुर के जंगल में तेंदुए के खौफ से पहरे के बीच चारा काटते किसान। - फोटो : KHATAULI
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ककरौली (मुजफ्फरनगर)। गांव दौलतपुर में तेंदुए की आहट को लेकर गांव में अभी तक खौफ मंडरा रहा है। जिसके चलते गांव के किसान खेतों पर लाठी, डंडे व भाले साथ लेकर जाने को मजबूर हैं। ग्रामीण बच्चों को दिन ढलते ही घर से बाहर जाने पर रोक लगा देते हैं। जंगल से महिलाओं ने भी चारा लाना बंद कर दिया है। तेंदुए के डर के चलते ग्रामीण पशुओं को सूखा भूसा खिलाने को मजबूर हैं। पशुपालक पशुओं को खुली जगह के बजाए बंद चहारदीवारी में बांध रहे हैं। तेंदुए के खौफ से गांव में ग्रामीणों के रिश्तेदारों ने भी आना बंद कर दिया है। वन विभाग के आला अधिकारियों ने ग्रामीणों को बच्चों की सुरक्षा के लिए रात में जागकर पहरा देने का मशविरा दिया है।
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पिछले कई दिन से तेंदुए के गुर्राने की आवाज सुनने व जंगल में मिले पदचिह्नों को लेकर किसानों ने बताया कि दहशत के कारण गन्नों की छिलाई नहीं होने से वे गन्ने की पर्ची भी नहीं डाल पा रहे हैं। किसान लाठी डंडे व भाले लेकर समूह बनाकर खेतों में चारा लेने के लिए जाते हैं। कोई भी किसान भैंसा बुग्गी के साथ जंगल में नहीं जा रहा है। गांव में दहशत के चलते ग्रामीण बच्चों व महिलाओं को घर में रखने पर मजबूर हो रहे हैं। गांव में सभी ग्रामीणों को सतर्क रहने के लिए दिन के समय और शाम को भी मुनादी कराई जा रही है। साजिद, दानिश, राहुल, अमरपाल, अनस, जावेद, अहमद अली, शाहनजर, इरशाद, सैदा, पप्पू, दीपक, उस्मान, गय्यूर, गुलशेर, इस्लाम आदि ग्रामीणों ने बताया कि बृहस्पतिवार को वन विभाग के अफसर क्षेत्र में तेंदुआ नहीं होने की बात कहकर बिना बताए ही अपने कार्रवाई रजिस्टर पर कुछ ग्रामीणों के हस्ताक्षर करा कर ले गए थे, जिसकी जानकारी ग्रामीणों को अफसरों ने बाद में दी। इसे लेकर ग्रामीणों ने वन विभाग के अफसरों पर हस्ताक्षर कराने को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं।
डीएफओ ने तेंदुए को लेकर ग्रामीणों से जानकारी ली
गांव दौलतपुर में ग्राम प्रधान के चबूतरे पर डीएफओ सूरज अपने साथ रेंजर सिंह राजसिंह पुंडीर, वन दरोगा सबी हैदर व सत्येंद्र कुमार, वनरक्षक सुनील कुमार, पशु रक्षक राजकुमार व अमन सहित टीम के साथ पहुंचे और ग्रामीणों से तेंदुए के बारे में जानकारी ली। डीएफओ ने ग्रामीणों से सतर्कता बरतने को कहा सााि ही बच्चों की सुरक्षा के लिए रात में जाग कर पहरा देने की भी सलाह दी। उन्होंने कहा कि कोई भी किसान व महिला अकेले जंगल में न जाए, क्योंकि गर्दन झुकाकर चारा काट रहे लोगों पर तेंदुआ सबसे पहले हमला करता। और किसी भी ग्रामीण को अगर कहीं कोई तेंदुआ होने की जानकारी मिले, तो वह उन्हें फोन कर सूचना दें।
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