अस्पताल और बस अड्डे तक जाने में छूटते हैं पसीने
मुजफ्फरनगर। शहर बढ़ता गया, लेकिन सुविधाएं नहीं बढ़ी। बाहरी कॉलोनियों में जिंदगी गुजार रहे लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इन कॉलोनियों तक परिवहन, चिकित्सा और शिक्षा की सुविधा नहीं पहुंची। लोगों को सरकारी चिकित्सा सुविधा के लिए जिला अस्पताल पहुंचने में मुश्किलें खड़ी हो जाती है।
शहर का जानसठ और भोपा रोड पर अत्यधिक विस्तार हुआ है। रुड़की रोड और पचेंडा रोड पर शहर हाइवे तक जाने को तैयार है। सहावली रोड पर नई कालोनियां बन रही है। यहां सबसे बड़ी बात यह है कि शहर का सीमा विस्तार तो हुआ नहीं है, लेकिन बाईपास तक शहर में आवासीय कालोनियां बन रही है। कुछ लोग प्लाट लेकर भी मकान बना रहे हैं। भोपा रोड पर कई कालोनी बन चुकी है। हाइवे तक शहर तेजी के साथ बढता जा रहा है। इस मार्ग पर निजी हॉस्पिटल तो बने हैं, लेकिन विस्तारित शहर में सरकारी अस्पताल की कोई सुविधा नहीं है। यही स्थिति जानसठ रोड की है, यहां सरकारी अस्पताल की सुविधा नहीं है।
सरकारी स्कूलों तक पहुंचना आसान नहीं
शहर के पॉश इलाकों में स रकारी शिक्षण संस्थान नहीं खुले।पब्लिक और मान्यता प्राप्त स्कूलों के सहारे ही जनता को छोड़ दिया गया है।
दिन हो या रात, परिवहन की व्यवस्था नहीं
परिवहन की बात की जाए तो ट्रांसपोर्ट नगर विस्तारित शहर में बनाया गया है। एक दशक से अधिक इसे बने हो गया है, लेकिन आज तक भी रोडवेज बस अड्डा तो दूर यहां पर कोई टेंपो स्टेंड तक नहीं बन पाया है। बसों का संचालन अंदर शहर से ही हो रहा है। शहर के बाहरी हिस्सों में परिवहन की कोई सुविधा नहीं है। अपने निजी वाहन से ही आ सकते हैं।
कब बनेगा थाना, कब बढ़ेगी सुरक्षा
पुलिस स्टेशन की बात करें तो एक लंबे समय से शहर में तीन ही पुलिस स्टेशन है। केवल महिला थाना बढ़ा है। शहर कोतवाली का क्षेत्र किदवईनगर नदी तक बढ गया है। लाखों की आबादी इस थाना क्षेत्र में है, कई बार खालापार चौकी को थाना बनाने की बात हुई लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया गया। इसी तरह नई मंडी में भी काफी क्षेत्र बढ़ गया है। पुलिस चौकी तो यहां बढ़ी है, लेकिन थाना नहीं बना है।
- द्वारका सिटी निवासी हरेंद्र का कहना है कि जिन लोगों के पास निजी वाहन नहीं है, वह बेहद परेशान है। रोडवेज बस अड्डे, प्रकाश चौक, महावीर चौक या शहर में कहीं भी जाने के िलए मुसीबत होती है।
- बुढ़ाना मोड निवासी प्रकाश का कहना है कि बसें यहां नहीं रुकती। रोडवेज स्टैंड तक पहुंचना ही बेहद महंगा है। प्रशासन को लोगों की समस्या पर ध्यान देना चाहिए।