मुजफ्फरनगर। बहेड़ी गांव के श्मशान की भूमि पर अनुसूचित जाति के लोगों को पट्टा आवंटन का आदेश 45 साल बाद निरस्त हो गया है। 1975 में ट्रेनी आईएएस और सदर तहसील की एसडीएम नीरा यादव ने ग्राम पंचायत के प्रस्ताव पर तीन-तीन बीघा के दस पट्टों का आवंटन किया था। चीनी मिल रोहाना ने 1989 में पट्टेदारों से इस जमीन को अधिग्रहित करा लिया था। जमीन के आवंटन और खरीदारी पर शुरू से ही शिकायत हो रही थी। डीएम के न्यायालय में यह मामला 20 दिसंबर 2019 से चल रहा था।
बहेड़ी गांव के श्मशान की भूमि को लेकर 45 साल बाद आए निर्णय में डीएम सेल्वा कुमारी जे ने कहा कि एक दिसंबर 1975 का भूमि प्रबंधक समिति बहेड़ी का प्रस्ताव, जिस पर 31 दिसंबर 1975 को एसडीएम ने स्वीकृति दी थी, निरस्त किया जाता है। एसडीएम सदर और तहसीलदार को जमीन पर कब्जे के आदेश दिए गए हैं। भूमि की मूल नवैय्यत राजस्व अभिलेखों में दर्ज करें। बहेड़ी गांव के सुदेश शुक्ला, अभिषेक, नरेश त्यागी, विपुल, राजकुमार, प्रमोद, आर्यन ने डीएम के न्यायालय में वाद दायर किया था कि गांव की श्मशान की भूमि पर पट्टा आवंटन नहीं हो सकता था। 31 दिसंबर 1975 को पट्टा आवंटन के बाद एक दिसंबर 1989 को भूमि का अधिग्रहण रोहाना चीनी मिल ने कर लिया गया। बाद में इस चीनी मिल को आईपीएल ग्रुप ने खरीद लिया। इस मिल ने उक्त जमीन पर डिस्टलरी पास करा ली।
डीएम कोर्ट में लगातार मामला चला। डेढ़ साल में तहसीलदार और एसडीएम की जांच रिपोर्ट भी न्यायिक प्रक्रिया में शामिल हुई। आदेश में लिखा गया है कि आवंटित भूमि के खसरा संख्या 635 के क्षेत्रफल 2.0500 हेक्टेयर मरघट की श्रेणी 6-3 की सार्वजनिक उपयोग की भूमि है। इस भूमि का कृषि आवंटन विधिक नहीं है। दोनों ओर से गवाह, साक्ष्य के आधार पर डीएम ने निर्णय सुनाते हुए कहा कि धारा-77 उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 में प्राविधानिक किया गया है कि खलियान, खाद के गड्ढे, चारागाह, कब्रिस्तान या श्मशान के लिए प्रयुक्त भूमि पर भूमिधरी के अधिकार प्राप्त नहीं होंगे। विवादित भूमि पर किया गया आवंटन विधि विरुद्ध है।
डीएम के निर्णय के बाद जमीन को कब्जा मुक्त कराकर ग्राम प्रधान और लेखपाल की सुपुर्दगी में दे दिया गया है। - दीपक कुमार, एसडीएम सदर