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‘धर्म की बुनियाद पर लाया गया कानून मंजूर नहीं’

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देवबंद में सीएए के विरोध में धरना प्रदर्शन करती महिलाएं - फोटो : DEVBAND
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देवबंद (सहारनपुर)। नागरिकता संशोधन कानून, एनपीआर और प्रस्तावित एनआरसी को लेकर महिलाओं का धरना प्रदर्शन 37वें दिन भी जारी रहा। आंदोलनकारी महिलाओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एनपीआर को 2011 की शर्तों पर कराए जाने तथा सीएए को वापस लेने की मांग की। उन्होंने यह भी कहा कि अगर एनपीआर के बढ़े हुए कॉलम को नहीं हटाया जाता तो इसका पूर्ण रुप से बहिष्कार किया जाएगा।
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मुत्तहिदा ख्वातीन कमेटी के बैनर तले 27 जनवरी से चल रहा महिलाओं के अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन में मंगलवार को फरहाना ने कहा कि सोशल मीडिया को छोड़ने की बात करने वाले देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगर वास्तव में दिल्ली हिंसा को लेकर दुखी हैं तो वह देश में पनप रहे नफरत के माहौल को खत्म करने का काम करें। ताकि मुल्क में फिर से प्यार और मोहब्बत का माहौल बन सके। आमना रोशी व इरम उस्मानी ने संयुक्त रुप से कहा कि धर्म की बुनियाद पर लाया गया काला कानून किसी कीमत पर मंजूर नहीं किया जाएगा। सरकार ने षड्यंत्र के तहत एनपीआर में कॉलम बढ़ा कर उसे एनआरसी का रुप दे दिया है। उन्होंने कहा कि अगर वर्ष 2011 के आधार पर एनपीआर नहीं होता तो इसका पूर्ण रुप से बहिष्कार किया जाएगा। निशात उस्मानी और हदिया जहांगीर ने कहा कि देश के 135 करोड़ लोगों के न्याय के लिए मुल्क के विभिन्न हिस्सों में चल रहा धरना प्रदर्शन किसी एक समुदाय के लिए नहीं है। गंदी राजनीति करने वाले लोग इन विरोध प्रदर्शनों को धार्मिक रुप देने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन वह इसमें कभी कामयाब नहीं होंगे। उन्होंने सभी से शांतिपूर्वक आंदोलन में हिस्सा लेने तथा अफवाहों पर ध्यान न देने का आह्वान किया।
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