सोरम की एतिहासिक चौपाल पर की अपनी अंतिम सभा
मुजफ्फरनगर। रालोद मुखिया चौधरी अजित सिंह ने जिले के गांव सोरम की एतिहासिक चौपाल पर अपनी अंतिम सभा की। यहां आकर वो पीड़ित ग्रामीणों से मिले। घर पहुंच कर उनका दर्द सुना। न्याय का भरोसा दिला। साथ ही सौहार्द का परिचय देते हुए कानूनन लड़ाई लड़ने की बात कहते हुए हमले के विरोध में घोषित की गई महापंचायत को भी रद्द कराया।
शाहपुर के गांव सोरम में 22 फरवरी को केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान के आने पर उनके कुछ समर्थकों ने उनका विरोध कर रहे ग्रामीणों के साथ मारपीट की थी। मामला तूल पकड़ गया था। घटना के अगले रोज ही 23 फरवरी की सुबह रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह सोरम गांव में पीड़ितों के बीच पहुंच गए। उन्होंने घरों पर जाकर पीड़ितों का हाल जाना। न्याय का भरोसा दिया। कहा कि हम तुम्हारे साथ है। गांव में सर्वखाप की ऐतिहासिक चौपाल पर उन्होंने ग्रामीणों की सभा को संबोधित किया। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार पर निराशा साधा। हमेशा सद्भाव और सौहार्द पर कायम रहे छोटे चौधरी ने साथ ही ग्रामीणों से गांव का सौहार्द बनाए रखने और घोषित महापंचायत न करने की बात कही। उन्होंने ग्रामीणों का समझाया कि कानून का अपना काम करने दो। हमें यहीं रहना है इसलिए आपसी भाईचारा कायम रखो। उनकी बात को मानते हुए ग्रामीणों ने महापंचायत रद्द कर दी थी।
मुझे आप लोगों के बीच में आकर अच्छा लगता है
मुजफ्फरनगर। लोकसभा चुनाव में पराजित होने के बावजूद पंद्रह दिन बाद ही चौधरी अजित सिंह जनपद में ग्रामीणों के बीच थे। बुढ़ाना के डाक बंगले पर उन्होंने कहा, मैं राजनीति करने नहीं आया हूं, मैं तो तुम्हारा धन्यवाद करने आया हूं, चुनाव में अपने बहुत मेहनत की है। जान पहचान हो गई, अब तो बैठ कर गपशप लड़ाएंगे, राजनीति हो न हो, मुझे आप लोगों के बीच आकर अच्छा लगता है, बस और कोई कारण नहीं है।